वाराणसी: ’80 मुस्लिम घरों में 45 हिंदू मंदिर मिलने’ का सच

सोशल मीडिया

ढहे हुए मकानों के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ शेयर किये जा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के बनारस में ‘काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर प्रोजेक्ट’ के लिए मोदी सरकार ने रास्ते में पड़ने वाले 80 मुस्लिम घरों को ख़रीद लिया है.

जिन लोगों ने ये वीडियो शेयर किये हैं, उन्होंने लिखा है, “काशी विश्वनाथ मंदिर से गंगा नदी तक सड़क को चौड़ा करने के लिए मोदी ने 80 मुस्लिम घरों को ख़रीद लिया है. जब उन्होंने इन घरों को साफ़ करना शुरू किया तो इन घरों के अंदर 45 पुराने मंदिरों की खोज की गई.”

सोशल मीडिया

लेकिन बीते कुछ दिनों में इस परियोजना से जोड़ते हुए ट्विटर और फ़ेसबुक पर जो वीडियो सैकड़ों बार शेयर किये गए हैं, वो भ्रामक हैं

बनारस

दावे की सच्चाई

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण की योजना पर काम करने के लिए सरकार ने काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद का गठन किया है.

इस परिषद में उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारी विशाल सिंह मुख्य कार्यपालक आधिकारी यानी सीईओ के पद पर कार्यरत हैं.

मंदिर परिसर के निर्माण के लिए ‘मुस्लिम घरों को ख़रीदे जाने’ और उनमें ‘हिंदू मंदिरों की खोज’ का जो दावा किया जा रहा है, उसके बारे में हमने विशाल सिंह से बात की.

उन्होंने बीबीसी संवाददाता प्रशांत चाहल को बताया कि ये सभी दावे फ़र्ज़ी हैं.

बीबीसी

उन्होंने कहा, “इस परियोजना के लिए हमने अभी तक कुल 249 मकान क्रय किये हैं. जितने भी घर मंदिर प्रशासन द्वारा क्रय किये गए हैं इस योजना के लिए, उन घरों में से एक भी घर किसी अन्य धर्म का नहीं था. ये सभी मकान जो क्रय किये गये, ये सभी सनातन धर्म के हिंदू धर्मावलंबियों के ही थे.”

विशाल सिंह ने कहा कि “जितने भी मकान अब तक क्रय किये गए हैं, उनमें से 183 मकान तोड़े जा चुके हैं. टूटे हुए मकानों में छोटे-बड़े मंदिरों की संख्या मिलाकर कुल 23 मंदिर हमें मिले हैं.”

BBC

मंदिर प्रशासन के अनुसार काशी विश्वनाथ कॉरिडोर योजना की मूल भावना ये है कि गंगा तट से विश्वनाथ मंदिर साफ़-साफ़ दिखाई पड़े.

अभी श्रद्धालु सँकरी गलियों से होकर मंदिर तक जाते हैं. भीड़ होने के कारण यहाँ लंबी-लंबी लाइनें लगती हैं.

गलियों के किनारे बने ऊंचे-ऊंचे मकानों की वजह से मंदिर का शिखर तक नहीं दिखाई पड़ता.

इसके लिए ज़ाहिर है कि पुराने घरों और गलियों को ख़त्म करना पड़ेगा. लेकिन स्थानीय लोग ऐसा नहीं करने देना चाहते.

उस समय लोगों का कहना था कि पुरानी गलियाँ ही बनारस की पहचान हैं और अगर इसे ख़त्म कर दिया गया तो बनारस जैसे प्राचीन शहर और दूसरे नए शहरों में फ़र्क़ क्या रह जाएगा?

समीरात्मज मिश्र बताते हैं, “बनारस के जिस इलाक़े में मंदिर के सौंदर्यीकरण का काम हो रहा है, वो मुख्य रूप से हिंदू बहुल इलाक़ा है. वहाँ मुसलमानों के घर नहीं हैं. जब हमने इस परियोजना के बारे में स्थानील लोगों से बात की थी तो वो घरों को तोड़े जाने से काफ़ी नाराज़ थे.”