भारत की शिकायत लेकर जापान पहुंचा विश्व व्यापार संगठन के पास, ये है पूरा मामला,

जापान ने मोबाइल फोन, बेस स्टेशन और राउटर पर भारत की ड्यूटी को लेकर विश्व व्यापार संगठन में शिकायत की है.

जापान का कहना है कि भारत ने अपने मेक इन इंडिया अभियान के बाद कहा था कि वह अपने घरेलु उत्पादन को बढ़ने के लिए तमाम टैक्स को कम करेगा. जापान का कहना है कि भारत कुछ सामानों पर WTO द्वारा तय की गई दरों से ज्यादा ले रहा है.

जापान का कहना है कि भारत के विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता की शर्तों में कहा था कि इन वस्तुओं पर आयात शुल्क शून्य प्रतिशत था, लेकिन भारत ने मोबाइल फोन और बेस स्टेशनों पर 20% टैरिफ लागू किया, और अन्य उत्पादों पर 10%, 15% और 20% टैरिफ लगाया. यूएन-डब्ल्यूटीओ के संयुक्त उपक्रम इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर द्वारा प्रदान किए गए व्यापार डेटा में दिखाया गया है कि जापान ने भारत के मोबाइल फोन आयात में 2011 में 53 मिलियन डॉलर और 2012 में 43 मिलियन डॉलर का योगदान दिया. 

भारत के मोबाइल फोन आयात पर फ़िलहाल चीन का कब्ज़ा है. 2018 में कुल 5.7 बिलियन डॉलर के स्विफ्ट और राउटर के भारत के आयात पर चीन और वियतनाम का कब्ज़ा था, जबकि जापान से आयात 52 मिलियन डॉलर था, जो भारतीय आयात बाजार का 1 प्रतिशत से भी कम है.

डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत, भारत के पास विवाद को निपटाने के लिए 60 दिन का समय है, लेकिन उसके बाद जापान डब्ल्यूटीओ को यह मांग कर सकता है कि कि भारत टैरिफ नियमों को तोड़ता है, तो एक सहायक पैनल गठित किया जाये.