BJP अध्यक्ष का पद छोड़ मंत्री बनेंगे अमित शाह? -प्रेस रिव्यू

नरेंद्र मोदी, अमित शाह

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रियों की टीम के साथ 30 मई यानी शुक्रवार शाम को शपथ ले सकते हैं.

अख़बार लिखता है कि मोदी राष्ट्रपति भवन में एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. बताया जा रहा है कि उनके शपथ ग्रहण समारोह में दूसरे देशों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा.

शनिवार की शाम संसद के सेंट्रल हॉल में भाजपा और सहयोगी दलों के नवनिर्वाचित सांसदों की एक बैठक होगी, जिसकी अध्यक्षता पीएम मोदी करेंगे.

इसी के साथ नए मंत्रिमंडल के गठन की तैयारियां ज़ोरों पर हैं.

अमित शाह को कैबिनेट में शामिल किए जाने को लेकर बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की राय बंटी हुई है. कुछ नेताओं का कहना है कि शाह ने अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वो पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ना चाहते हैं.null

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अख़बार लिखता है कि पीएम मोदी की नई टीम में चार मंत्री पश्चिम बंगाल से हो सकते हैं. पिछली बार यह संख्या दो थी.

ओडिशा और कर्नाटक से भी ज़्यादा प्रतिनिधियों की संख्या रहने की उम्मीद जताई जा रही है. अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि नई कैबिनेट में महिला मंत्रियों की संख्या भी ज़्यादा हो सकती है.

राहुल गांधी

कमलनाथ ने बताया, क्यों हारी कांग्रेस

इंडियन एक्सप्रेस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का साक्षात्कार छपा है. इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि कांग्रेस को ‘न्याय’ जैसी स्कीम और प्रियंका गांधी जैसी नेता को और पहले आगे करना चाहिए था.

कमलनाथ का मानना है कि ये फ़ैसले देर से लेने मतदाताओं तक पार्टी का संदेश सही समय पर और ठीक तरीके से नहीं पहुंचा.

कमलनाथ ने ये भी स्वीकार किया भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चुनाव से काफ़ी पहले ही ज़मीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया था जोकि कांग्रेस ने नहीं किया. हालांकि उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि राहुल कांग्रेस के नेता हैं और हमेशा रहेंगे.

इंडियन एक्सप्रेस की ही एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक़ कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस चुनाव में पीएम मोदी और बीजेपी के ख़िलाफ़ राहुल गांधी की निगेटिव कैंपेनिंग असफल रही.

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दूसरे देशों को हथियार बेचेगा भारत

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत ने दूसरे देशों को हथियार और सैन्य उपकरणों बेचने के लिए नियमों में ढील दी है.

अख़बार लिखता है कि हालांकि ये नियम उन्हीं देशों के लिए होंगे जिनसे भारत के साथ मित्रतापूर्ण रिश्ते हैं जैसे कि बांग्लादेश, वियतनाम, श्रीलंका, अफ़गानिस्तान और म्यांमार.

अख़बार रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखता है कि नए नियम विदेश मंत्रालय से विचार-विमर्श के बाद बनाए गए हैं. नए नियमों को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीज़र (SOP) का नाम दिया गया है.

इस कदम से न सिर्फ़ भारत अपने सैन्य उपकरणों का निर्यात बढ़ा सकेगा बल्कि बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों मे चीन के एकाधिकार पर भी लगाम लगा सकेगा.

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फ़ारूक़ अब्दुल्ला

कश्मीर से धारा-370 कभी नहीं हटा पाएंगे मोदी

इकोनॉमिक टाइम्स में ख़बर है कि जम्मू-कश्मीर की नेशनल कॉन्फ़्रेंस पार्टी के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चाहे कितना ही विशाल जनादेश क्यों न मिल जाए वो कश्मीर से धारा-370 और अनुच्छेद-35ए नहीं हटा पाएंगे.

इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार पर अब्दुल्ला ने कहा कि राहुल गांधी पांच साल के बाद अमेठी में पहले से ज़्यादा मज़बूत वापसी करेंगे.

उन्होंने कहा, “कभी आप हारते हैं, कभी जीतते हैं. ये खेल का हिस्सा है.”

फ़ारूक़ अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने घाटी में सभी तीन सीटों पर जीत हासिल की है. वहीं, बीजेपी को जम्मू में दो और लद्दाख में एक सीट पर जीत मिली है.

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कच्चा तेल

भारत का ईरान और वेनेज़ुएला से तेल खरीदना बंद

जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक़ अमरीका की ओर से पाबंदियों पर मिली छूट के ख़त्म होने के बाद भारत ने ईरान से कच्चा तेल खरीदना बंद कर दिया है.

यह जानकारी अमरीका में भारत के राजदूत हर्षवर्धन ने दी है.

उन्होंने बताया कि भारत ने अप्रैल में ईरान से खरीदे जाने वाले कच्चे तेल की मात्रा 2.5 अरब टन से घटाकर एक अरब टन कर दी थी. ईरान से भारत के लगभग 10 फ़ीसदी तेल की आपूर्ति होती थी.

हर्षवर्धन ने बताया के भारत ने ईरान के साथ ही वेनेज़ुएला से भी तेल खरीदना बंद कर दिया है.

अमरीका द्वारा भारत को दी गई छूट इस महीने के पहले हफ़्ते में ख़त्म हो गई थी और अमरीका ने इस छूट की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया था.