इमरान ख़ान इस दुष्चक्र से कैसे निकलें बाहर, बजट से पहले संकट


इमरान ख़ान

इमरान ख़ान ने पाकिस्तान के चुनावी अभियानों में वादा किया था कि वो ख़ुदकुशी करना पसंद करेंगे लेकिन क़र्ज़ नहीं लेंगे. प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान ख़ान को अहसास हुआ कि क़र्ज लेना के अलावा कोई उपाय नहीं है और ख़ुदकुशी की बात अस्थायी भाव थी.

पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार 2019-2020 वित्तीय वर्ष के लिए अगले मंगलवार को बजट पेश करने वाली है.

इमरान ख़ान सरकार के लिए यह बजट आसान नहीं है. पाकिस्तान का राजस्व घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है और अब वो नियंत्रण से बाहर निकल चुका है. इमरान ख़ान की सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती राजस्व घाटा ही है.

अर्थशास्त्री सरकार को चेता रहे हैं कि पाकिस्तान की सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 6 अरब डॉलर के क़र्ज़ के लिए जो बात कर रही है उसकी शर्तों में खर्चों में 700 अरब रुपए की कटौती और नए टैक्स लगाने जैसी बाते हैं.

‘निक्केई एशियन रिव्यू‘ से पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है, ”आईएमफ़ की शर्तों से पाकिस्तान के लिए नई मुश्किल खड़ी होने वाली है और यह ऐतिहासिक होगी.

पाक रुपया

भ्रष्टाचार और आर्थिक तंगहाली: दो मोर्चे पर लड़ाई

2017 से डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रुपया क़रीब 50 फ़ीसदी नीचे गिर जा चुका है. पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए मुख्य तौर पर डॉलर का ही इस्तेमाल होता है.

कुछ अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि बजट से पहले महंगाई क़रीब नौ फ़ीसदी रह सकती है. इस बीच विपक्षी दलों के नेता आर्थिक तंगहाली के लिए इमरान ख़ान को घेरे हुए हैं.

इमरान ख़ान की तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) साल 2018 में सत्ता में आई थी. पीटीआई ने पाकिस्तान में हुए आम चुनावों में नवाज शरीफ़ को सत्ता से बाहर किया था.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नवाज शरीफ़ को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था. शरीफ़ पर पनामा पेपर्स में भ्रष्टाचार के आरोप थे.

पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने बीते महीने सार्वजनिक तौर पर चेतावनी दी थी कि अर्थव्यवस्था में सुधार और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के काम एक साथ नहीं हो सकते.

ज़रदारी के बयान से दूसरे विपक्षी दलों और उद्योगपतियों ने भी सुर से सुर मिलाए. इन लोगों ने आलोचना करते हए कहा कि बीते कुछ महीनों में नेशनल अकाउंटबिलटी ब्यूरो यानी नैब की कोशिशों से कॉरपोरेट अनिश्चितताएं बढ़ी हैं.

सरकार ऐसी आलोचनाओं को ख़ारिज करती रही है.

इमरान ख़ान के क़रीबी इफ्तिख़ार दुर्रानी ने निक्केई से कहा, ”भ्रष्टाचार को ख़त्म करने से नए निवेश लाने में आसानी रहेगी. निवेशकों में ये विश्वास पैदा हो सकेगा कि वो पाकिस्तान में निवेश कर सकते हैं. इस आत्मविश्वास को ख़त्म करने की क्या ज़रूरत है?”

पाकिस्तान रुपया

आईएमएफ़ की शर्तें मानेंगे इमरान ख़ान?

अगर बजट में इमरान ख़ान की सरकार आईएमफ़ की शर्तों के हिसाब से क़दम उठाती है तो उन्हें लोगों के ग़ुस्से का सामना करना पड़ सकता है.

पश्चिम के कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बजट से बिजली और गैस महंगी हो सकती है. पाकिस्तान में लोगों के लिए जीवन बसर करना आने वाले दिनों में महंगा हो सकता है.

ऐसे में इसका ग़ुस्सा सड़क पर खुलकर सामने आ सकता है और फिर टकराव की आशंका बढ़ जाएगी. हालांकि पाकिस्तान के आर्थिक सलाहकार अब्दुल हफ़ीज़ ने पत्रकारों से कहा है कि चीज़ों को बढ़ाचढ़ाकर पेश किया जा रहा है.

हफ़ीज़ ने कहा, ”हमने आईएमएफ़ से पहले भी क़र्ज़ लिए हैं. इससे पाकिस्तान का भुगतान संतुलन दुरुस्त हुआ है न कि संकट की स्थिति बनी है. यह पाकिस्तान की सेहत के लिए ज़रूरी है.”

जिस प्रमुख सुधार पर विचार हो रहा है, उसमें टैक्स चोरी पर लगाम कसना शामिल है. पाकिस्तान में सिर्फ़ एक फ़ीसदी आबादी टैक्स देती है. बीते कई साल से आईएमएफ़ समेत कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान पाकिस्तान से आग्रह कर रहे हैं कि वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को टैक्स के दायरे में लाएं लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है.

पाकिस्तान के कई ताक़तवर कारोबारी, बड़े किसान परिवार और प्रॉपर्टी में निवेश करने वाले कोई टैक्स नहीं चुका रहे हैं.

अतीत में रोज़मर्रा के लेन-देन पर नियंत्रण कसने के लिए सेल्स टैक्स नियमों को कड़ा बनाने का प्रयास भी किया गया था लेकिन कारोबारी संघों की तरफ़ से इसका काफ़ी तीखा विरोध हुआ.

अगर इमरान ख़ान घाटे पर काबू पाने के लिए छंटनी का रास्ता अपनाते हैं, तो उन्हें नुक़सान में चल रहे सरकारी संस्थानों की यूनियन की तरफ़ से भी विरोध झेलना होगा.

इनमें पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के अलावा देश के सबसे बड़े इस्पात कारखाने कराची स्टील मिल्स और बिजली-गैस संस्थान शामिल हैं.

जिनपिंग के साथ इमरान

चीन की भूमिका

नवाज़ शरीफ़ कैबिनेट में मंत्री रह चुके विपक्ष के एक नेता का कहना है कि इमरान ख़ान अगर सुधारों की तरफ़ कदम बढ़ाएंगे तो उन्हें बेशक कड़े विरोध का सामना करना होगा.

उन्होंने कहा है, ”इस सरकार के लिए सुधारों की तरफ़ कोई भी क़दम बढ़ाना काफ़ी कठिन होगा. जब सरकार के क़दमों का यूनियन विरोध करने लगेंगी तो उसे अहसास होगा कि वो चारों तरफ़ से विरोध में घिरती जा रही है.”

पाकिस्तान का भुगतान असंतुलन व्यापार घाटे के कारण थमने का नाम नहीं ले रहा. ऐसा इसलिए है कि पाकिस्तान का आयात लगातार बढ़ा रहा है और यह पिछले वित्तीय वर्ष के आख़िर तक 60.898 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.

पाकिस्तान के अर्थशास्त्री सलमान शाह ने द डिप्लोमैट से कहा है, ”पाकिस्तान के व्यापार घाटे में चीन की बड़ी भूमिका है. पाकिस्तान चीन से आयात की तुलना में निर्यात ना के बराबर कर रहा है. ऐसे में पाकिस्तान चीन के साथ फ़्री ट्रेड समझौते पर फिर से विचार कर रहा है.

क़रीब 60 अरब डॉलर की सीपीईसी परियोजना के तहत चीन पाकिस्तान में आधारभूत ढांचा का विकास कर रहा है. फाइनैंशियल टाइम्स की रिपोर्ट का कहना है कि चीन हमेशा से इस परियोजना के तहत पाकिस्तान को मिले क़र्ज़ को सार्वजनिक करने को लेकर अनिच्छुक रहा है.

पाकिस्तान के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चीन से क़र्ज़ समस्या का समाधान नहीं है. पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री मुश्ताक़ ख़ान ने फाइनैंशियल टाइम्स से कहा, ”पाकिस्तानी नीति निर्माता आर्थिक घाटे को कम करने के लिए कोई ठोस क़दम नहीं उठा रहे हैं. ये केवल नुक़सान के गैप को कम करने की कोशिश कर रहे हैं. चीन से हमारी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है.”

सीपीईसी परियोजना को लेकर कहा जा रहा है कि पाकिस्तान ने सारे अंडे एक ही टोकरी में रख दिए हैं और अगर अंडे फूटे तो एक भी नहीं बचेगा.


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