धोनी के ग्लब्स पर बलिदान चिन्ह लगाने से पाकिस्तानी मंत्री को लगी मिर्ची, कहा- ‘खेलने गए हैं, महाभारत के लिए नहीं’


भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और विकेट कीपर बल्लेबाज एमएस धोनी के कीपिंग के दौरान ग्लब्स पर बलिदान का चिन्ह लगाने से पाकिस्तानी मंत्री को मिर्ची लग गई है. उन्होंने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि धोनी वहां क्रिकेट खेलने गए हैं, महाभारत के लिए नहीं.

Pakistani minister reacts on Dhoni wearing soldiers insignia on his gloves

नई दिल्ली: पाकिस्तान सरकार में विज्ञान और तकनीक मंत्री चौधरी फवाद हुसैन को एमएस धोनी के विकेट कीपिंग के दौरान ग्लब्स पर बलिदान चिन्ह लगाने से मिर्ची लग गई है. पाकिस्तानी मंत्री ने कहा है कि धोनी इंग्लैंड क्रिकेट खेलने गए हैं न कि महाभारत. दरअसल, साउथ अफ्रीका के खिलाफ विश्वकप के पहले भारतीय मैच में जब महेंद्र सिंह धोनी विकेट कीपिंग कर रहे थे तो उस दौरान उनके ग्लब्स पर भारतीय सेना के बलिदान का एक चित्र था. ग्लब्स पर इस चिन्ह के रहने से आईसीसी ने बीसीसीआई से आपत्ति जताई है और इसे हटाने का आग्रह किया. इसके बाद से देश में इस बात पर चर्चा तेज हो गई कि आखिर ग्लब्स पर इस चिन्ह के रहने से आईसीसी को क्या आपत्ति है.

पाकिस्तानी मंत्री का बयान
पाकिस्तानी मंत्री ने ट्वीट कर कहा, “धोनी इंग्लैंड क्रिकेट खेलने गए हैं न कि महाभारत. भारतीय मीडिया पर जंग का इतना खुमार चढ़ा हुआ है कि इन्हें सीरिया, अफगानिस्तान और रवांडा में लड़ने के लिए भेज देना चाहिए.”

धोनी को मिला है सेना से यह सम्मान
बता दें कि साल 2011 में एमएस धोनी को प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक दी गई थी. वह यह सम्मान पाने वाले पूर्व कप्तान कपिल देव के बाद दूसरे खिलाड़ी हैं. धोनी साल 2015 में प्रशिक्षित पैराट्रूपर बन गए थे. आगरा के पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में भारतीय वायु सेना के एएन-32 विमान से पांचवीं छलांग पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित पैरा विंग्स प्रतीक चिह्न लगाने की जरूरी योग्यता हासिल कर ली थी.

आईसीसी का नियम
हालांकि, आईसीसी के नियम के मुताबिक, ”खिलाड़ी और टीम के अधिकारी के जर्सी पर किसी तरह का ऐसा कोई साइन नहीं होना चाहिए जो कि राजनीतिक, धार्मिक और किसी खास रेस से संबंधित हो.”

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