धोनी के ग्लव्स पर बना चिन्ह पैरा-एसएफ रेजीमेंट का बैज नहीं


धोनी के ग्लव्स पर बलिदान बैज को लेकर आईसीसी ने आपत्ति जताई है इसके बाद बीसीसीआई, सरकार सभी धोनी के साथ खड़े हैं. बीसीसीआई ने सफा साफ कहा है कि धोनी ने जो बैज लगाया है वो किसी कमर्शियल का हिस्सा नहीं है इसलिए नियम का उल्लंघन नहीं होता.

Insignia on dhoni gloves is not para sf badge

नई दिल्ली: महेंद्र सिंह धोनी के कीपिंग ग्लव्स पर सेना के ‘बलिदान लोगो’ को लेकर विवाद बढ़ गया है. आईसीसी ने लोगो पर रोक लगाई तो बीसीसीआई अब धोनी के साथ खड़ी हो गई है. बीसीसीआई कह रही है कि उन्होंने आईसीसी से इसकी इजाजत मांगी है. वहीं सेना कह रही है कि धोनी के ग्लव्स पर मौजूद लोगो को सेना का बलिदान चिन्ह कहना सही नहीं है क्योंकि पैरा एसएफ का बैज भूरे रंग पर होता है और जिसपर ‘बलिदान’ लिखा होता है.

सेना मुख्यालय‌ के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने एबीपी न्यूज को बताया कि पैरा-एसएफ (पैराशूट-स्पेशल फोर्सेज़) रेजीमेंट का बैज (खंजर और उसके साथ दो विंग्स) हमेशा मैरून रंग का होता है. उसपर ‘बलिदान’ भी लिखा होता है और पैराएसएफ कमांडोज़ इस बैज को अपने सीने पर लगाते हैं. अधिकारी के मुताबिक, धोनी का चिंह किसी भी तरह से पैराएसएफ का नहीं है.

लेकिन आपको बता दें कि महेन्द्र सिंह धोनी सेना की पैराशूट रेजीमेंट की टीए यानि टेरेटोरियल-आर्मी के लेफ्टिनेंट कर्नल हैं. उन्हें ये रैंक पैरा-जंप की ट्रैनिंग पूरा करने पर मिली है. लेकिन वे भी जब यूनिफार्म पहनते हैं तो अपने सीने पर पैराशूट रेजीमेंट का बैज (तीसरी फोटो) लगा सकते हैं, पैरा-एसएफ का बैज नहीं लगा सकते हैं.

जानकारी के मुताबिक, पैरा-एसएफ का बैज एक कड़ी ट्रैनिंग के बाद ही मिल सकता है. पैराएसएफ में मात्र 25-30 प्रतिशत सैनिक ही ज्वाइन कर पाते हैं. बाकी सभी को उनकी यूनिट में भेज दिया जाता है. इसीलिए पैराएसएफ सबसे छोटी लेकिन सबसे ‘एलीट’ रेजीमेंट है भारतीय सेना की. पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक भी पैराएसएफ कमांड़ोज़ ने की थी.

खेल मंत्री रिजीजू बोले- BCCI दे जानकारी, देश के सम्मान के साथ समझौता नहीं
धोनी के ग्बल्स को चल रहे विवाद पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया आई है. खेल मंत्री किरेन रिजीजू ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि BCCI दे जानकारी, देश के सम्मान के साथ समझौता नहीं होगा. उन्होंने कहा, ”बीसीसीआई हो या कोई भी फेडरेशन हो ये स्वायत्त संस्था हैं और वो अपने तरीके से खेल का प्रबंधन करते हैं और मुद्दों को भी सुलझाते हैं. लेकिन कोई खेल हो जब देश के लिए खेलता है और खिलाड़ी देश के लिए खेलता है. और जहां देश की इज्जत और साख जुड़ी हुई है, वहां कोई भी घटना जो आम लोगों की भवना से जुड़ी है उसकी जानकारी सरकार को देनी चाहिए. सरकार इसमें पूरी तरह से साथ में खड़ी है. हम खिलाड़िओं के पीछे खड़े हैं, सबको देश के लिए काम करते रहना है.”

धोनी के ग्लव्स पर बलिदान बैज से पाकिस्तान को मिर्ची
धोनी के ग्लव्स विवाद से पाकिस्तान का कोई लेना-देना नहीं है लेकिन पाकिस्तान के मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने इसे लेकर विरोध जताया है. फवाद चौदरी ने ट्वीट किया, ”धोनी इंग्लैंड में क्रिकेट खेलने गए हैं, महाभारत के लिए नहीं, भारत की मीडिया में बेकार की बहस चल रही है. भारत की मीडिया का एक धड़ा युद्ध को लेकर इतना उन्मादी है कि उन्हें सीरिया, अफगानिस्तान या रवांडा भेज देना चाहिए.” बता दें कि पाकिस्तान को लगी मिर्ची इसलिए लग रही है क्योंकि भारतीय सेना की पैरा स्पेशल फोर्स ने ही 2016 में POK में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी.

आईसीसी का नियम क्या कहता है?
ICC ने नियम के तहत प्लेयर और टीम के अधिकारियों को आर्म बैंड या ड्रेस के जरिए कोई भी निजी संदेश देने की अनुमति नहीं है. किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय संदेश या लोगो की इजाजत नहीं है. आईसीसी के मुताबिक ग्लव्स पर सिर्फ मैन्युफैक्चरर के 2 लोगो की इजाजत है. इसके अलावा कोई दूसरा लोगो नहीं.

hi_INHindi
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