वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कई क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठकें करेंगी

इस बैठक में उन्होंने किसानों के लिए लोन, छूट, उर्वरकों पर टैक्स समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की. 11 से 23 जून तक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कई क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठकें करेंगी.

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (ANI)

वित्त मंत्रालय संभालने के बाद निर्मला सीतारमण ने बजट की तैयारियां शुरू कर दी हैं. आज यानी मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि और ग्रामीण विकास के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठकें कीं. इस बैठक में किसानों के लिए लोन, छूट, उर्वरकों पर टैक्स समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई. 11 से 23 जून तक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कई क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठकें करेंगी.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले सप्ताह आर्थिक विकास और रोजगार बढ़ाने के मसलों का समाधान करने के लिए दो मंत्रिमंडलीय समितियों की नियुक्ति की थी. निवेश और आर्थिक विकास पर बनी मंत्रिमंडलीय समिति आर्थिक विकास को रफ्तार दिलाने और इन्फ्रास्ट्रक्चर और कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने को लेकर कदम उठाने का सुझाव देगी. रोजगार और कौशल विकास पर बनी 10 सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति ज्यादा से ज्यादा रोजगार पैदा करने के उपायों की तलाश करेगी.

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इसके पहले प्रमुख उद्योग चैंबर्स, सीआईआई, फिक्की और एसोचैम के साथ बैठक किया था. देश के लोगों से भी 20 जून तक अपने सुझाव देने को कहा गया है. एनडीए की पूर्व सरकार ने एक फरवरी को अंतरिम बजट में घोषणा की थी कि प्रमुख घोषणाएं नियमित बजट में की जाएंगी. नई 17वीं लोकसभा का पहला सत्र 17 जून को शुरू होगा और यह 26 जुलाई तक चलेगा. संसद में बजट पेश होने के एक दिन पहले चार जुलाई को 2019-20 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा.

पहले पूर्ण बजट में लेखानुदान में की गई अलग अलग घोषणाओं के संबंध में देखा जाएगा कि उन्हें या तो लागू किया जाएगा या आगे बढ़ाया जाएगा. इन प्रस्तावों में मंत्रिमंडल ने पहले ही पीएम-किसान योजना में विस्तार करने का फैसला लिया है जिसके तहत छोटे किसानों को दी जाने वाली 6000 रुपए सालाना आर्थिक सहायता के दायरे में सभी किसानों को शामिल किया जाएगा. तत्कालीन वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट में पांच लाख रुपए सालाना आय पाने वालों को आयकर के दायरे से बाहर रखा था और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मासिक 3000 रुपए पेंशन देने का प्रावधान किया था.