तीन तलाक पर फिर बिल लाएगी सरकार, आधार नियमों में बदलाव का भी आएगा बिल


जिन 9 अध्यादेशों के बदले बिल आएगा उनमें प्रमुख तौर पर तीन तलाक़ रोकने, आधार के नियमों में बदलाव करने और जम्मू कश्मीर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगे गांवों के लोगों को आरक्षण का लाभ देने से जुड़ा बिल शामिल है.

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नई दिल्लीः तीन तलाक़ की प्रथा को गैर कानूनी घोषित करने के लिए मोदी सरकार एक बार फिर बिल लाएगी. नया बिल इसी मसले पर फिलहाल लागू अध्यादेश की जगह लेगा. आज कैबिनेट की बैठक में नये बिल को मंज़ूरी मिल गई. कैबिनेट ने जम्मू कश्मीर में पहले से लागू राष्ट्रपति शासन को और 6 महीने बढ़ाने को भी हरी झंडी दे दी.

9 अध्यादेशों के बदले आएगा बिल
कैबिनेट ने पहले से लागू 9 अध्यादेशों के बदले संसद से मंज़ूरी लेकर कानून बनाने के लिए बिलों पर अपनी मुहर लगा दी. इन सभी बिलों को 17 जून से शुरू हो रहे संसद सत्र में पेश किया जाएगा. जिन 9 अध्यादेशों के बदले बिल आएगा उनमें प्रमुख तौर पर तीन तलाक़ रोकने, आधार के नियमों में बदलाव करने और जम्मू कश्मीर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगे गांवों के लोगों को आरक्षण का लाभ देने से जुड़ा बिल शामिल है.

तीन तलाक़ बिल पारित करवाना मोदी सरकार के लिए चुनौती
तीन तलाक़ बिल में तीन तलाक़ प्रथा की पीड़ित महिलाओं को अधिकार देने और इस प्रथा को ग़ैर कानूनी घोषित किए जाने का प्रावधान है. तीन तलाक़ के दोषी लोगों को तीन साल तक की कैद और जुर्माने के प्रावधान के साथ साथ पीड़ित महिला दोषी की ओर से गुज़ारा भत्ता दिए जाने का इंतज़ाम भी किया गया है. हालांकि इस कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए बिल में प्रावधान है कि केवल पीड़ित महिला और उसे खून के रिश्तेदार ही तीन तलाक़ की शिकायत दर्ज करा सकेंगे. हालांकि इसके पहले भी मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में दो बार तीन तलाक़ बिल को संसद से पारित करवाने की कोशिश की थी लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के चलते इसमें क़ामयाबी नहीं मिल पाई थी. हालांकि सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने उम्मीद जताई कि इस बार विपक्ष भी इस बिल का समर्थन करेगा.

आधार नियमों में बदलाव पर लगेगी संसद की मुहर
कैबिनेट ने आधार नियमों में बदलाव करने के लिए इस साल 2 मार्च को लाए गए अध्यादेश के बदले भी संसद में पेश होने वाले बिल को मंज़ूरी दे दी है. अध्यादेश की तरह ही बिल में ऑफलाइन वेरिफिकेशन और केवाईसी जैसे कामों के लिए आधार को अनिवार्य की जगह वैकल्पिक माध्यम बनाया गया है. बिल में एक अहम प्रावधान इस बात का भी है कि जिस बच्चे का आधार कार्ड बन चुका है तो 18 साल का होने पर अगर वो चाहे तो अपने आधार कार्ड को रद्द भी करवा सकता है. साथ ही आधार कार्ड सत्यापित नहीं हो पाने की हालत में किसी भी व्यक्ति को सस्ते राशन और बाकी सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकेगा. सुप्रीम कोर्ट ने आधार कानून में बदलाव करने का आदेश दिया था.

जम्मू कश्मीर में बढ़ी राष्ट्रपति शासन की अवधि
उधर जम्मू कश्मीर में जारी हालात को देखते हुए एक बार फिर राज्य में लागू राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने का फ़ैसला लिया गया है. कैबिनेट की बैठक में 2 जुलाई को समाप्त हो रही राष्ट्रपति शासन की अवधि को और 6 महीने बढ़ाने का फ़ैसला लिया गया है. राज्य के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने केंद्र सरकार से राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने की सिफारिश की थी. उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल के अंत में राज्य में विधानसभा के चुनाव कराने पर विचार हो सकता है

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