देशभर के अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर्स का प्रदर्शन, हर तरफ परेशान रहे मरीज


डॉक्टर्स के प्रदर्शन का असर दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, तिरुवनंतपुरम, जयपुर, रायपुर के अस्पतालों में दिखा. हर तरफ मरीजों को और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा.

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कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में पिछले चार दिनों से हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टर्स को देशभर के डॉक्टर्स का साथ मिला है. डाक्टर्स के प्रदर्शन और हड़ताल के कारण दिल्ली के एम्स, सफदरजंग समेत देश के कई हिस्सों में अस्पतालों में मरीज परेशान दिखे.

इस बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को झटका देते हुए कहा है कि पहले वह हड़ताली डॉक्टर्स से बातचीत करे और उसे मनाए. कलकत्ता हाईकोर्ट में डॉक्टर्स के हड़ताल के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी और कहा गया था कि अदालत डॉक्टर्स को काम पर तुरंत लौटने का आदेश दे.

हड़ताल का समर्थन करते हुए कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के 16 डॉक्टर्स और नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के 27 डॉक्टर्स ने अपना इस्तीफा दे दिया है. सभी का कहना है कि मौजूदा स्थिति की प्रतिक्रिया के रूप में हम सेवा देने में असमर्थ हैं, हम इस्तीफा देना चाहते हैं.

पश्चिम बंगाल में डॉक्टर्स की हड़ताल के समर्थन में भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने आज ‘अखिल भारतीय विरोध दिवस’ घोषित किया है. इसका असर देशभर में देखा गया. दिल्ली में डॉक्टर्स ने कहीं हेलमेट पहनकर तो कहीं काली पट्टी बांधकर मरीजों के इलाज किए. कुछ डॉक्टर्स ने एक जगह इकट्ठे होकर नारेबाजी की. बिहार की राजधानी पटना और कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में डॉक्टर्स का समूह सड़कों पर उतरा और इंसाफ की मांग की.

केरल के तिरुवनंतपुरम में ‘डॉक्टर के खिलाफ हिंसा बंद हो’ की तख्ती लिए डॉक्टर्स ने प्रदर्शन किए. जयपुर में जयपुरिया अस्पताल में डॉक्टर्स ने बांह में काली पट्टी लगाकर मरीजों के इलाज किए. छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी इसी तरह का नजारा दिखा. नागपुर में भी जूनियर डॉक्टर्स सड़कों पर दिखे और व्हील चेयर पर बैठकर खुद को असहाय दिखाया. इन डॉक्टर्स ने सिर पर घाव की पट्टी भी बांधी.

प्रदर्शन के बीच हर्षवर्धन से मुलाकात
दिल्ली में स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने जूनियर डॉक्टर्स के एसोसिएशन के प्रतिधिमंडल से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि मैं डॉक्टर्स से अपील करता हूं कि वे सांकेतिक प्रदर्शन करें और काम करते रहें. साथ ही हर्षवर्धन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कहा कि वे हड़ताल के मुद्दे को प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाएं. उन्होंने डॉक्टर्स को अल्टीमेटम दिया जिससे डॉक्टर्स में गुस्सा बढ़ा और वे हड़ताल पर गए.

क्यों हड़ताल पर हैं डॉक्टर्स?
कोलकाता के सरकारी एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार की रात एक मृत मरीज के परिवार के सदस्यों ने दो जूनियर चिकित्सकों पर हमला कर दिया था जिसके खिलाफ चिकित्सक प्रदर्शन कर रहे हैं और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा फिर से सेवा शुरू नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दिये जाने के बावजूद जूनियर डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल जारी रखी है. पश्चिम बंगाल में सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों और कई निजी मेडिकल संस्थानों में ओपीडी और अन्य विभागों में सेवाएं पूरी तरह बाधित है.

जूनियर डॉक्टरों के संयुक्त फोरम के प्रवक्ता डॉक्टर अरिंदम दत्ता ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने जिस तरीके से जूनियर डॉक्टरों को धमकी दी है वह अप्रत्याशित है…यह हमारे समुदाय का अपमान है. हम इसकी भी निंदा करते हैं.. उन्होंने कल जो कहा इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए.’’

राज्य के कई हिस्सों में चिकित्सा सेवाओं के बाधित होने के मद्देनजर गुरुरवार को राजकीय एसएसकेएम अस्पताल का दौरा करने वाली बनर्जी ने डॉक्टरों को चेतावनी दी कि अगर वे काम पर नहीं आएंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जिसकी वजह से डॉक्टर्स में और अधिक नाराजगी बढ़ी.

hi_INHindi
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