एक बार फिर राम मंदिर मुद्दा गरमाता नजर आ रहा है


मोदी सरकार की दूसरी बार प्रचंड जीत के बाद एक बार फिर राम मंदिर मुद्दा का गरमाता  मजर आ रहा है. आज यानि शनिवार को राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज के 81वें जन्मोत्सव के मौके पर अयोध्या में “संत सम्मेलन” आयोजित किया गया है.

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मोदी सरकार की दूसरी बार प्रचंड जीत के बाद एक बार फिर राम मंदिर मुद्दा का गरमाता नजर आ रहा है. आज यानि शनिवार को राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज के 81वें जन्मोत्सव के मौके पर अयोध्या में “संत सम्मेलन” आयोजित किया गया है.

इस सम्मेलन में मंदिर निर्माण पर मंथन होगा. यहां विशेष रूप से राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए मंथन होगा. इसके अलावा भारत की वर्तमान स्थित, आतंकवाद, सामाजिक समन्वय, मठ- मंदिरों की सुरक्षा और विकास पर भी चर्चा की जाएगी.

राम जन्मभूमि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसके बाद भी समय-समय पर इसके निर्माण की मांग उठती रहती है. पिछले दिनों विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने दावा किया था कि राम मंदिर निर्माण कार्य 18 महीने में शुरू हो जाएगा. एक बार फिर इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए संत सम्मेलन का आयोजन किया गया है.

इस सम्मेलन में शंकराचार्य, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी, रामभद्राचार्य, दीदी मां साध्वी ऋतंभरा और स्वामी चिन्मयानंद शामिल होंगे. इनके अलावा पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेंद्र जी, आचार्य महासभा महामंत्री स्वामी परमात्मानंद, स्वामी अविचल दास रेवासा, पीठाधीश्वर राघवाचार्य जी, महाराज महामंत्री मिलिंद परांडे जी, डॉ रामेश्वर दास वैष्णव जी, पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री दिल्ली भाजपा प्रभारी कुंवर जयभानु सिंह पवैया, केन्द्रीय मंत्री राजेन्द्र सिंह पंकज सहित देश के विभिन्न प्रांतों के प्रमुख संत धर्माचार्य उपस्थित रहेंगे.

बता दें कि देश में लोकसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद एक बार फिर से अयोध्या में राम मंदिर की मांग तेज हो गई है. इससे पहले 5 जून को विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने साफ किया था कि उनका संगठन राम मंदिर निर्माण पर अनिश्चितकाल तक के लिए इंतजार करने को तैयार नहीं है और संगठन ने एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले महीने के भीतर ही नरेंद्र मोदी सरकार को उनके वादे के बारे में याद दिलाने का फैसला किया है.

उन्होंने कहा था कि “एक बात साफ है, विहिप दो मुद्दों पर समझौता नहीं करेगी – पहला, भगवान राम के जन्मस्थान पर सिर्फ मंदिर बनेगा और दूसरा, अयोध्या की सांस्कृतिक सीमाओं के भीतर कोई मस्जिद नहीं हो सकती.”

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