DRI ने अदालत को बताया- अडानी समूह कर रहा है जांच में बाधा डालने की कोशिश,


डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेन्स (DRI) ने बॉम्बे हाईकोर्ट को 13 जून को दिए एक हलफनामे में कहा है कि अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) अपने खिलाफ चल रही जांच में बाधा डाल रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार अडानी समूह ने बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका दायर कर कहा था उन सभी लेटर ऑफ़ रोगटोरी (एलआर) को ख़ारिज कर दिया जाए जो उनके खिलाफ सिंगापुर समेत अन्य देशों को जारी किये गए हैं.

एलआर एक देश से दूसरे देश में पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (एमएलएटी) के तहत एक औपचारिक अनुरोध है. इस संधि के तहत दूसरे देश में स्थापित कंपनी की जानकारी हासिल की जाती है. पिछले साल एईएल ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसमें एजेंसी द्वारा जारी किए गए सभी एलआर को ख़त्म करने का अनुरोध किया गया था.

अदानी समूह की कंपनियों के खिलाफ इंडोनेशिया के कोयले के आयात में ओवर वैल्यूएशन के आरोप में जांच की जा रही है. हाईकोर्ट ने सितंबर 2018 में एईएल को अंतरिम रोक लगाई थी. इसकी जांच रुकने पर DRI ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. शीर्ष अदालत ने अब उच्च न्यायालय को इस महीने के अंत तक मामले का फैसला करने का निर्देश दिया है.

डीआरआई के हलफनामे में कहा गया है कि एईएल ने बॉम्बे हाई कोर्ट को एलआर के जारी करने पर सवाल उठाया, क्योंकि सिंगापुर की अदालत ने अडानी समूह के खिलाफ साक्ष्य जुटाने वाले दस्तावेजों को एक्सेस करने के लिए भारत के अनुरोध को अनुमति दी थी. डीआरआई कम से कम 40 कंपनियों की जांच कर रही है, जिनमें अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) की दो कंपनियां, एस्सार समूह की दो फर्म और कुछ सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनियां शामिल हैं.

कहा गया है कि इंडोनेशिया से 2011 और 2015 के बीच 29,000 करोड़ रुपये की आय हुई. अब तक, DRI ने कई विदेशी क्षेत्रों जैसे सिंगापुर, हांगकांग, स्विट्जरलैंड, यूएई को 14 LRs जारी किए हैं, जबकि इंडोनेशियाई कोयले के आयात के कथित अति-मूल्यांकन में जानकारी मांगी है. इस मामले के परिणाम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) एसएफआईओ जैसी अन्य एजेंसियों द्वारा जांच को प्रभावित किया जा सकता है क्योंकि ये अक्सर विदेशी क्षेत्राधिकार से जानकारी लेने के लिए एलआर का उपयोग करते हैं.

hi_INHindi
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