महायोगी गुरु गोरखनाथ से ही गोरखपुर की पहचान है, उनसे ही योग वैश्विक स्तर पर पहुंचा- योगी आदित्यनाथ


गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि योग जोड़ने को कहते हैं. ईश्वर, पंथ और लोगों को जोड़ने वाला एकता का माध्यम बनाने का काम भारत ने किया है.

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गोरखपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम सब गोरखपुर के वासी हैं. महायोगी गुरु गोरखनाथ के नाम पर ही इसका नाम है. जितनी भी योग क्रियाएं हैं, वे महायोगी गुरु गोरखनाथ से वैश्विक स्तर पर पहुंची है. इसलिए गोरखपुर के लोगों को गर्व होना चाहिए. योग की अलग-अलग विधा की शुरुआत शुद्धि से होती है. पूजा के पहले आचमन के लिए हम जल का छिड़काव कर शुद्ध होते हैं. योग भी वाह्य और आंतरिक शुद्धि की प्रेरणा देता है.

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में योग दिवस पर गुरु श्रीगोरखनाथ शोधपीठ एवं अभिनव दृष्टि (प्रज्ञा प्रवाह) की ओर से “योग मानव को भारतीय ज्ञान परम्परा का अतुल्य योगदान” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने भारत और योग को पूरे विश्व में स्थापित किया. 11 दिसंबर 2014 को इसे पूरे विश्व में मान्यता दी गई. 2016 से इस दिन को लागू किया गया. पूरा विश्व भारत के साथ योग दिवस पर झूमता हुआ दिखाई दिया.

चीन जैसा देश भी इसे गंभीरता से अपना रहा है. पूरी दुनिया इसे प्रसाद के रूप में स्वीकार कर रही है इसके लिए हर भारतीय को गर्व की अनुभूति होनी चाहिए. शोधपीठ के माध्यम से पुस्तिका के प्रकाशन के लिए हृदय से बधाई देता हूं. योग की अलग-अलग विधा की शुरुआत शुद्धि से होती है. पूजा के पहले आचमन के लिए हम जल का छिड़काव कर शुद्ध होते हैं. योग भी वाह्य और आंतरिक शुद्धि की प्रेरणा देता है.

हम सब गोरखपुर के वासी हैं. महायोगी गुरु गोरखनाथ के नाम पर ही इसका नाम है. इसका श्रेय पीएम मोदी को जाता है. योग जोड़ने को कहते हैं. ईश्वर, पंथ और लोगों को जोड़ने वाला एकता का माध्यम बनाने का काम भारत ने किया है. पहले कुम्भ में अराजकता का आलम रहता था. कुम्भ को इस बार यूनेस्को के साथ 71 देशों ने अपने राष्ट्र ध्वजा को स्थापित कर सहभागी बने. यूएनओ के सदस्य देश योग की तरह कुम्भ में भागीदार बनें. इसके लिए दुनिया के 194 में से 189 देश के लोगों ने आकर मानवता के समागम को देखा और भारत की आस्था को हिलोरे लेते हुए देखा है.

पीएम मोदी ने कहा था कि हमें स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छ भी रहना होगा. दुनिया हैरत करती है कि स्वच्छ भारत मिशन कैसे सफल हो गया. जब सब कोई मिलकर किसी कार्य को करते हैं, तो वो सफल होता है. हमने 40 साल से इन्सेफेलाइटिस से मासूमों को मरते देखा है. हमने आवाज भी उठाई. लेकिन, स्वच्छ भारत मिशन का सबसे ज्यादा असर इस क्षेत्र और बीआरडी मेडिकल कालेज में देखने को मिला. पिछले दो साल के शासनकाल में एक साल में ही परिणाम देखने को मिले. जहां 600 बच्चे भर्ती होते थे, वहां 86 भर्ती हुए. जहां 80 से 90 मौतें होती थी वहां सिर्फ 6 मौतें हुई.

हमें यम और नियम की व्यवस्था में सामन्जस्य बनाना होगा. एक-दूसरे को नजरअंदाज कर आगे नहीं बढ़ सकते हैं. चोटिल हो जाएंगे. योग के सोपान को क्रमिक रूप से ही प्राप्त किया जा सकता है. शिक्षा के क्षेत्र को योग के माध्यम से सशक्त बना सकते हैं. व्यवहारिक जीवन में भी हम इसे अंगीकार कर सकते हैं. वृहत्तर भारत का कोई ऐसा देश नहीं है जहां महायोगी गुरु गोरखनाथ की पीठ न हो. पाकिस्तान के पेशावर में भी गोरखनाथ जी का धूना और पहाड़ है. भारत के साथ नेपाल, भूटान में उनकी पीठ किसी न किसी रूप में मौजूद है. योग को लेकर एक धारणा लोगों के मन में थी कि कहीं घर का बच्चा योगी न हो जाय. लेकिन अब लोगों की धारणा बदली है.

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हजारों वर्ष पहले पुष्पक विमान था और भगवान राम उसी से लंका से अयोध्या आए थे. विमान के आविष्कार के कारण पश्चिमी देश इसे नकार नहीं सकते हैं. हमारे देश में जो भी आविष्कार हुए उसे ऋषि परंपरा ने लोक कल्याण के लिये किया. त्रिपुरा की 35 से 36 फीसदी आबादी गुरु गोरखनाथ जी कर अनुयायी है. साउथ में भी महायोगी गुरु गोरखनाथ के अनुयायी हैं. दुनिया का हर व्यक्ति आत्मिक शांति की सोच रखता है. भारत ने योग को जन्म दिया है. कोई और इसे अंगीकार कर सकता है. इस पर अपना हक नहीं जता सकता है. यूनेस्को आड़े आ जाएगा.

उन्होंने कहा कि महायोगी गुरु गोरखनाथ शोधपीठ की ओर से नाथ पंथ और महायोगी पर इनसाइक्लोपीडिया तैयार करना चाहिए. इसके लिए मैंने पहले भी कहा था. ये बड़ा काम होगा. किसी भी भाषा में महायोगी गुरु गोरखनाथ और नाथ पंथ पर मिल जाएगा. उसे संग्रहित और व्यवस्थित करना होगा. मालिक मोहम्मद जायसी जैसे सूफी संत भी ये मानते हैं कि योग तभी पूरा माना जायेगा जब महायोगी गुरु गोरखनाथ के योग को समझेंगे. योग उन्हीं से शुरू होता है और उन्हीं पर खत्म होता है. दूसरे पंथ और मजहब का सूफी संत उन्हें मानता है. उन्होंने जायसी में गोरखनाथ का मंदिर भी स्थापित किया है.

योग वृहत्तर भारत और देश को जोड़ने का माध्यम बन सकता है. वहीं मानवता से लोगों को जोड़ने का कार्य भी कर सकता है. महायोगी गुरु गोरखनाथ के विश्वकोष का संकलन कर उसका प्रकाशन करने में हम सफल होंगे, तो शोधपीठ की स्थापना का उद्देश्य सफल होता हुआ दिखाई देगा. योग से बुढ़ापा नहीं आता है. मनुष्य निरोग रहता है और उसे अकाल मृत्यु से छुटकारा मिल जाता है.

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