घर के अंदर तक पहुंचेगी सरकार की यह नीति, घरेलू सहायकों के आएंगे अच्छे दिन


सरकार अब मेड, ड्राइवर जैसे घरेलू कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय नीति लाने की तैयारी कर रही है.इससे घरेलू नौकरों, ड्राइवरों आदि के दिन बहुर जाएंगे और उन्हें वे सारी सुविधाएं मिलेंगी जो संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को मिलती हैं.

घरेलू कामगारों के लिए आएगी पॉलिसी

मोदी सरकार सोशल सेक्टर में अपने प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए अब मेड, ड्राइवर जैसे घरेलू कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय नीति लाने की तैयारी कर रही है. इससे करीब 50 लाख लोगों को फायदा होगा. श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने यह जानकारी दी है. इस नीति को लाने का उद्देश्य घरेलू कामगारों की मदद करना और उन्हें सरकारी नीतियों का फायदा पहुंचाना है. इस पॉलिसी की पहुंच आपके घर के अंदर तक होगी.

इससे घरेलू नौकरों, ड्राइवरों आदि के दिन बहुर जाएंगे और उन्हें वे सारी सुविधाएं मिलेंगी जो संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को मिलती हैं. यह नीति लागू हुई तो उन्हें उन्हें ईएसआइ, भविष्य निधि, सवेतन अवकाश, मातृत्व अवकाश वगैरह जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं.  

एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘नेशनल पॉलिसी फॉर डोमेस्ट‍िक वर्कर्स’ को सबसे पहले 2015 में प्रस्तावित किया गया था. इससे लोगों को न केवल अपने घरेलू नौकरों, ड्राइवरों को ज्यादा सैलरी देनी पड़ेगी, बल्कि इससे कागजी कार्यवाही भी बढ़ जाएगी. इसलिए पिछले चार साल से विरोध की वजह से यह नीति लागू नहीं हो पाई है.

संतोष गंगवार ने लोकसभा में बताया कि घरेलू कामगारों के बारे में एक राष्ट्रीय प्रारूप तैयार है जिस पर केंद्र सरकार विचार कर रही है. इस पॉलिसी के तहत घरेलू कामगारों को भी मौजूदा सभी नियम-कायदों में शामिल किया जाएगा और उनका रजिस्ट्रेशन कर उन्हें वैध कामगारों के रूप में अधिकार दिए जाएंगे.

इसके अलावा घरेलू कामगारों को अपने संगठन और यूनियन बनाने का भी अधिकार होगा. इसके द्वारा नौकरों-ड्राइवरों को न्यूनतम वेतन का अधिकार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच तथा दुर्व्यवहार, प्रताड़ना और हिंसा से सुरक्षा हासिल हो सकेगी.

इसके अलावा, प्रारूप नीति में प्रस्ताव रखा गया है कि घरेलू नौकरों को मुहैया कराने वाले प्लेसमेंट एजेंसियों को भी नियंत्रित और विनियमित किया जाएगा. उनके प्रोफेशनल स्किल को सुधारने तथा उन्हें अदालतों और ट्राइब्यूनल की सेवाओं का लाभ मिलने को भी संभव बनाया जाएगा.

सरकार पिछले चार साल से सरकार इसे लाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कई वर्गों के विरोध की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा. इस नीति में मर्द-औरत सभी शामिल होंगे.

अभी देश में घरेलू नौकरों के लिए कोई नियम-कायदा नहीं है. लोग अपनी मर्जी से एक-दूसरे से जानकारी व पूछताछ के आधार पर अपने यहां घरेलू नौकर रख लेते हैं. इनके वेतन, छुट्टियों आदि का निर्धारण भी आपसी सहमति के आधार पर होता है. नई व्यवस्था बहुत कुछ विदेश की तर्ज पर होगी, जहां घरेलू नौकर रखने वालों को काफी कड़े नियम-कायदों का पालन करना पड़ता है.  

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