चमकी बुखार: 153 मौतों के बाद बोले नीतीश- सरकार ने जागरूकता फैलाई, राहत-बचाव में कोई कमी नहीं छोड़ी


बिहार में चमकी बुखार के कारण अभी तक करीब 153 बच्चों की मौत हो चुकी है. बिहार सरकार के आंकड़ों के मुताबिक मार्च से 28 जून तक 720 भर्ती हुए, 586 ठीक हुए और 154 बच्चों की मौत हो गई. मृत्यु दर घटकर 21% रह गई है.

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पटनाबिहार में चमकी बुखार से हुई मौतों के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा है कि इस बीमारी के बाद पूरे राज्य में सरकार ने जागरुकता फैलाई है. उन्होंने यह भी कहा कि अपनी तरफ से सरकार ने राहत और बचाव में कोई कमी नहीं छोड़ी. सीएम नीतीश के इस बयान से पहले बिहार विधानसभा में विपक्ष ने इस मामले को लेकर हंगामा किया और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का इस्तीफा मांगा. बिहार में चमकी बुखार के कारण अभी तक करीब 153 बच्चों की मौत हो चुकी है.

ये बहुत गंभीर मामला है सीएम नीतीश

विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार ने कहा, ‘’हम सिर्फ शोक प्रकट नहीं कर सकते. ये बहुत गंभीर मामला है. इतने बड़ी संख्या में बच्चों की मृत्यु हुई. हमने बैठक की और उसमें अपने अनुभव के आधार पर सुझाव दिया.’’ उन्होंने कहा, ‘’साल 2014 के पहले से बीमारी और मौत का सिलसिला चल रहा था. 2015 में एक बैठक में हुई जिसमें एक बात ये भी सामने आई कि सरयू नदी से गोरखपुर में ऐसी घटना होती थी.’’

नीतीश कुमार ने आगे कहा, ‘’मैंने साल 2015 में एम्स पटना में एक बैठक की थी. इस बैठक में विभिन्न विशेषज्ञों ने अलग-अलग विचार रखे कि इसका कारण क्या है. लेकिन सभी के विचार अलग-अलग थे. इस पर विशेषज्ञ की राय जानने के लिए एक रिपोर्ट भी अमेरिका भेजी गई थी.’’

सभी पीड़ित बच्चे गरीब परिवारों से- सीएम नीतीश

नीतीश ने कहा, ‘’जैपनीज़ इंसेफेलाइटिस से निपटने के लिए वैक्सीनेशन हो रहा है. सभी जगह इस बीमारे से संबंधित जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है. साथ ही लोगों को सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है.’’ उन्होंने बताया, ‘’जब में मुजफ्फरपुर अस्पताल गया तो वहां मैंने देखा की पीड़ित बच्चों में सबसे ज्यादा बच्चियां हैं और सभी पीड़ित परिवार गरीब तबके से आते हैं.’’

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने क्या कहा?

सीएम नीतीश से पहले स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने भी चमकी बुखार से संबंधित कुछ आंकड़े सदन में रखे. उन्होंने बताया, ‘’आंकड़ों के मुताबिक मार्च से  28 जून तक 720 भर्ती हुए, 586 ठीक हुए और 154 बच्चों की मौत हो गई. मृत्यु दर घटकर 21% रह गई है. साल 2011-19 के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ सालों में इस बीमारी के कारण मृत्यु दर कम हुई है.’’

उन्होंने कहा, ‘’मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ ही बैड की संख्या बढ़ाई गई और आने वाले समय में मुजफ्परपुर में बैड की संख्या को बढ़ाकर 2500 किया जाएगा.’’ मंगल पांडे ने बताया, ‘’अस्पतालों में परिजनों के विश्राम के लिए अलग कमरे बनाए जाएंगे.’’

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