क्या नोटबंदी का असर नहीं? तीन साल में 3,396 बिलियन बढ़ा मुद्रा परिचालन


संसद में सरकार ने  स्वीकार किया है कि बाजार में नiदी जितनी अधिक होगी, भ्रष्टाचार उतना ही अधिक होगा. सरकार ने माना है कि नोटबंदी के बाद मुद्रा परिचालन बढ़ा है.

संसद में सरकार ने बताया कि देश में मुद्रा परिचालन बढ़ा है. (फाइल फोटो)

संसद में सरकार ने बताया कि देश में मुद्रा परिचालन बढ़ा है.

नोटबंदी के बाद भी बाजार में मुद्रा का परिचालन बढ़ा है. खुद सरकार ने संसद में यह जानकारी दी है. सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि बाजार में नकदी जितनी अधिक होगी, भ्रष्टाचार उतना ही अधिक होगा. सरकार ने माना है कि दुनिया भर में नकदी और गलत गतिविधियों के बीच गहरा रिश्ता पाया जाता है.

दरअसल, सांसद राम प्रीत मंडल ने लोकसभा में वित्त मंत्री से तीन सवाल किए थे. उन्होंने पूछा था कि क्या नोटबंदी के बाद पिछले वर्षों की तुलना में मुद्रा का परिचालन बढ़ गया है. अगर हां तो विमुद्रीकरण के शुरुआत और मार्च 2019 तक देश में मुद्रा परिचालन का ब्यौरा क्या है. सांसद ने यह भी पूछा था कि मुद्रा परिचालन में वृद्धि के कारण अर्थव्यवस्था पर क्या नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं.

लोकसभा में जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वीकार किया कि नवंबर 2016 से परिचालन में करेंसी बढ़ी है. उन्होंने बताया कि 4 नवंबर 2016 की स्थिति के अनुसार नोटों का कुल मूल्य 17,741 बिलियन रुपये थे. 29 मार्च 2019 के अनुसार परिचालन में करेंसी का मूल्य 21,137.64 बिलियन रुपये था.  इससे पता चलता है कि नोटबंदी के बाद मुद्रा का परिचालन 3396 बिलियन रुपये बढ़ गया.यहां बता दें कि एक बिलियन बराबर सौ करोड़ होता है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी बताया कि आर्थिक समीक्षा 2016-17 के खंड वन में उल्लेख है कि दुनिया भर में नगदी और गलत कार्यकलापों के बीच गहरा रिश्ता पाया जाता है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के आंकलन  के अनुसार परिचालन में नगदी जितनी अधिक होगी, भ्रष्टाचार उतना ही अधिक होगा. वित्त मंत्री के जवाब से माना जा रहा है कि देश में नगदी परिचालन बढ़ने से भ्रष्टाचार भी बढ़ने की आशंका है.

hi_INHindi
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