देश में बन रहे 98 पावर प्लांट्स, पूरे हुए तो नहीं होगी बत्ती गुल


देश में अभी 98 पावर प्लांट्स का निर्माण हो रहा है. इनके पूरा होने पर देश को 77,030.65 मेगावॉट बिजली अतिरिक्त मिलेगी. देश के किसी भी हिस्से में बत्ती गुल नहीं होगी. इसके अलावा 30 प्लांट्स और बनाने की तैयारी है, लेकिन इन्हें अभी विभिन्न प्रकार के क्लियरेंस की जरूरत है. वर्तमान में भारत में थर्मल, हाइड्रो और परमाणु मिलाकर 462 पावर प्लांट्स 274,980 मेगावॉट बिजली सप्लाई कर रहे हैं.

देश में बन रहे हैं 98 पावर प्लांट्स. प्रतीकात्मक तस्वीर (रायटर्स)

देश में अभी 462 पावर प्लांट्स हैं. ये पूरे देश को 274,980 मेगावॉट बिजली सप्लाई कर रहे हैं. हालांकि अब भी देश में खराब वितरण प्रणाली और देखरेख के अभाव में कई घरों को बिजली नहीं मिल पा रही है. लेकिन देश में अभी कुल 98 पावर प्लांट्स का निर्माण हो रहा है. इसके अलावा 30 प्लांट्स और बनाने की तैयारी है, लेकिन इसके लिए विभिन्न प्रकार के क्लियरेंस की जरुरत है. जिन 98 पावर प्लांट्स का निर्माण हो रहा है, उनके पूरा होने पर देश को अतिरिक्त 77,030.65 मेगावॉट बिजली मिलेगी. देश के किसी भी हिस्से में बत्ती गुल नहीं होगी.

राज्यसभा में ऊर्जा मंत्रालय के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार आरके सिंह ने राज्यसभा में बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में अभी 12034 मेगावॉट क्षमता के 36 हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर प्लांट बनाए जा रहे हैं. इनके अलावा 62 जगहों पर थर्मल पावर प्लांट बनाए जा रहे हैं. इनके बनने के बाद देश को अतिरिक्त 77,030.65 मेगावॉट बिजली मिलेगी. मंत्री आरके सिंह ने बताया कि 23424 मेगावॉट क्षमता के 30 नए पावर प्लांट्स भी बनने हैं लेकिन इनमें से किसी का पर्यावरणीय तो किसी का फॉरेस्ट क्लियरेंस बाकी है. इन सबके बनने के बाद देश को कुल 128 नए पावर प्लांट्स मिलेंगे और देश को  100,454.65 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली मिलेगी.

भारत अब भी पावर-सरप्लस देश नहीं बन पाया है

देश में अभी इतनी बिजली पैदा नहीं हो रही है कि उसे पावर-सरप्लस देश की श्रेणी में रखा जाए. पिछले वित्त वर्ष की बात करें तो पीक आवर में बिजली की सप्लाई 0.8 फीसदी कम रही थी. जबकि कुल मांग में 0.6 प्रतिशत की कमी पाई गई. हालांकि, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की रिपोर्ट में 2018-19 के दौरान पीक घंटों में 2.5% और कुल 4.6% सरप्लस बिजली मिलने का अनुमान लगाया गया था.

सीईए के ताजा आंकड़ों को देखे तो पता चलता है कि 2018-19 में पीक आवर में 175.52 गीगावाट बिजली की सप्लाई हुई, जबकि मांग 177.02 गीगावाट की थी. यानी पीक आवर में 1.49 गीगावाट (0.8%) बिजली कम रही. पूरे साल 1,274 अरब यूनिट मांग थी, जबकि 1,267 अरब यूनिट की सप्लाई ही हो पाई. यानी 735 करोड़ यूनिट (0.6%) की कमी दर्ज की गई.

बिजली न मिलने का सबसे बड़ा कारणः ग्रिड में बिजली, घर में अंधेरा?

आपके घर तक बिजली न पहुंचने का कारण देश में बिजली की कमी कतई नहीं है. देश में बिजली उत्पादन की मौजूदा क्षमता पर्याप्त है. आपके घरों में बिजली न पहुंच पाने के पीछे वजह दरअसल खस्ताहाल बुनियादी ढांचा और कर्ज में लदे राज्य के विद्युत विभाग हैं, जो आर्थिक तंगी के चलते जरूरत के मुताबिक बिजली खरीद नहीं पाते और न ही बुनियादी ढांचे पर अपेक्षित खर्च कर पाते हैं.

hi_INHindi
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