भारत के आयोडीन नमक में खतरनाक कैमिकल का दावा, टाटा सॉल्ट ने कहा- हमारा नमक सुरक्षित

वेस्ट एनॉलिटिकल लेबोरेट्रीज की रिसर्च में यह खुलासा किया गया कि एक किलो नमक में 1.90 से 4.91 मिलीग्राम तक पोटाशियम फेरोसायनाड मिला होता है और यह कैंसर पैदा करने के लिए पर्याप्त है. अमेरिका और जर्मनी समेत 56 देशों ने नमक में पोटेशियम फेरोसायनाइड के इस्तेमाल पर बैन लगा रखा है जबकि भारत में इसका इस्तेमाल किया जाता है

भारत में आयोडीन नमक का हो रहा है जमकर इस्तेमाल (सांकेतिक फोटो-REUTERS)

एक समय देश में आयोडीन नमक का इस्तेमाल बढ़ाने को लेकर टीवी पर सरकारी विभाग और निजी कंपनियों दोनों ही ओर से जमकर विज्ञापन प्रसारित किए जाते थे. फिर आयोडीन की मांग बढ़ी और तेजी से यह नमक लोगों के किचन का हिस्सा बन गया. लेकिन पिछले दिनों अमेरिका की एक रिसर्च में दावा किया गया कि भारत में बेचे जाने वाले आयोडीन नमक में एक खतरनाक केमिकल मिला हुआ है जो लोगों को नपुसंक बना सकता है बल्कि इसमें कैंसर पैदा करने की क्षमता भी है.

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि आयोडीन नमक में इस्तेमाल केमिकल से तरह-तरह की कई अन्य गंभीर बीमारियों के चपेट में आने का डर भी रहता है. गोधुम ग्रेन्स एंड संस फार्म के चेयरमैन शिव शंकर गुप्ता के अनुसार अमेरिका की वेस्ट एनॉलिटिकल लेबोरेट्रीज (WAL) ने भारत की कई ब्रांडेड कंपनियों के नमक की जांच की. जांच में नमक में पोटेशियम फेरोसायनाइड नाम का केमिकल मिला. ये केमिकल कार्सिनोजेनिक होता है. कार्सिनोजेनिक यानी वह तत्व जो शरीर में कैंसर पैदा करने में सहायक होता है. इसका अर्थ यह हुआ कि आयोडीन नमक के इस्तेमाल से कैंसर भी हो सकता है.

आयोडीन नमक में खतरनाक केमिकल के इस्तेमाल की बात सामने आने पर जम्मू-कश्मीर में सरकार की ओर से टाटा नमक का सैंपल लेकर टेस्ट के लिए भेजा गया है.

कैंसर पैदा करने में सक्षम

वेस्ट एनॉलिटिकल लेबोरेट्रीज की रिसर्च में यह खुलासा किया गया कि एक किलो नमक में 1.90 से 4.91 मिलीग्राम तक पोटाशियम फेरोसायनाड मिला होता है और यह कैंसर पैदा करने के लिए पर्याप्त है. अमेरिका और जर्मनी समेत 56 देशों ने नमक में पोटेशियम फेरोसायनाइड के इस्तेमाल पर बैन लगा रखा है जबकि भारत में नमक को प्रोसेस करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है.

अमेरिका की रिसर्च कंपनी भारत से इस मसले पर बात करने के लिए लगातार संपर्क साध रही है, लेकिन अब भी कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला.

ब्लीचिंग से नमक होता है सफेद

भारत में नमक बनाने वाली कंपनियां इसके लिए ब्लीचिंग जैसी खतरनाक प्रक्रिया का इस्तेमाल करती हैं. ब्लीचिंग के प्रयोग से नमक सफेद दिखने लगता है. नमक को साफ करने की प्रक्रिया के दौरान उसमें आयोडीन और पोटेशियम फेरोसायनाइड मिलाया जाता है. इस प्रक्रिया को रिफाइंड कहा जाता है, लेकिन इससे नमक में मौजूद न्यूट्रीएंट्स खत्म हो जाती है. खास बात यह है कि नमक में प्राकृतिक रूप से आयोडीन मौजूद होता है.

कितना खतरनाक केमिकल

रिफाइंड नमक लोगों को नपुसंक बना सकता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, किडनी फेल होने की समस्या और मोटापा जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. पोटेशियम फेरोसायनाइड इतना खतरनाक होता है कि अगर इसे लैब से लेकर खा लिया जाए तो अंतड़ियां तक खराब हो सकती हैं. महज छूने भर से हाथ फूल सकते हैं और उन पर फफोले पड़ सकते हैं. गलती से सूंघ लेने से सांस संबंधी दिक्कत हो सकती है. वहीं यह केमिकल गलती से भी आंख में चला गया, तो आदमी अंधा भी हो सकता है.

गोधुम ग्रेन्स एंड संस फार्म के चेयरमैन शिव शंकर गुप्ता लंबे समय से जहरीले नमक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. 91 वर्षीय शिव शंकर गुप्ता का कहना है कि नमक में इस खतरनाक केमिकल के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है. लेकिन कंपनियां इसका धडल्ले से इस्तेमाल कर रहीं हैं. बड़ी कंपनियां इस पोटैशियम नाम के कचरे को पैक कर लोगों तक पहुंचाती हैं. लोग बिना किसी शिकायत के इसे इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उन्हें इसकी सच्चाई के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

टाटा नमक की सफाई

शिव शंकर गुप्ता ने इस मामले की गहराई से जांच के लिए आरटीआई भी दाखिल की जिसमें यह पता चला कि FSSAI ने कभी किसी ब्रांडेड नमक की जांच ही नहीं की है. फिर भी आयोडीन युक्त नमक सरेआम बाजार में बिक रहा है.

टाटा नमक ने भी इस संबंध में अपना जवाब दिया है. उसका कहना है कि कंपनी का नमक खाने के लिए सुरक्षित है. उसमें इस तरह का कोई केमिकल नहीं मिला है. ‘देश का नमक’ कहलाए जाने वाला टाटा अपने नमक में केमिकल के दावों को नकार रहा है.