आर्टिकल 370 हटाने के बाद अब कश्मीर में हो सकता है बड़ा इन्वेस्टर समिट,

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने के बाद यह चर्चा चल पड़ी है कि क्या अब कश्मीर में निजी कॉर्पोरेट घराने जमीन ले सकेंगे और वहां बड़ी मात्रा में निवेश कर सकेंगे.

सरकार का मानना है कि जम्मू और कश्मीर की स्थिति में बदलाव से नए केंद्र शासित प्रदेश में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा मिलेगा. गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि अनुच्छेद 370 और 35A के प्रावधानों ने कश्मीर विकास को रोका था.

एक मीडिया रिपोर्ट में प्रकाशित आंकड़ों की माने तो  केंद्र सरकार के कुल फंड का साल  2000 से 2016 के बीच 10 फीसदी राज्य को दिया गया. लेकिन विशेष प्रावधानों के कारण निजी निवेश न बराबर था. सरकार की और से यह भी माना गया था कि आर्टिकल 370 के प्रतिबंधों ने राज्य के बाहर के पेशेवरों और विशेषज्ञों को राज्य सरकार की नौकरियां लेने से भी रोक दिया, जिससे शैक्षणिक संस्थानों के लिए योग्य कर्मचारियों की कमी हो गई.

संसद में अपने भाषण में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इन स्पष्ट बाधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि “अनुच्छेद 370, 35A के कारण कोई भी उद्योग स्थापित नहीं किया जा सकता है. राज्य में भूमि खरीद और भूमि की कीमत पर प्रतिबंध के कारण पर्यटन का विकास नहीं हुआ. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में जेएंडके में एक निवेशक शिखर सम्मेलन की योजना बनाई गई है जिसमें प्रमुख औद्योगिक समूहों फार्मास्यूटिकल्स, कृषि प्रसंस्करण और स्वास्थ्य सेवा सहित अन्य क्षेत्रों के निवेश की उम्मीद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समिट का उद्घाटन करने की योजना है.

उद्योग के दिग्गजों का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में बदलाव से पर्याप्त निवेश लाने की क्षमता है. उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि फार्मास्युटिकल्स, एग्रो प्रोसेसिंग, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में मांग के कारण वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा. एसोचैम के अध्यक्ष बीके गोयनका ने कहा यह पर्यटन, रियल एस्टेट, हस्तशिल्प, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में राज्य में निवेश के प्रवाह को खोल देगा. गुणक प्रभाव से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भारत की सर्वांगीण समृद्धि में योगदान होगा.