अस्तित्व में आए दो नए केंद्रशासित प्रदेश, कैसे बदल गए जम्मू-कश्मीर में आज से ये नियम


भारत में अब कुल 28 राज्य ही रह गए. जबकि केंद्रशासित प्रदेशों की संख्या सात से बढ़कर नौ हो गई. बता दें कि भारत के इतिहास में ये पहली बार हुआ है कि जब किसी राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा गया है.

आजाद भारत के 70 साल के इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है. दरअसल, बुधवार और गुरुवार की आधी रात से जम्मू-कश्मीर का इतिहास ही नहीं बदला बल्कि यहां का भूगोल भी बदल गया और राज्य अब दो केंद्रशासित प्रदेशों में बदल गया. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्रशासित प्रदेश में बंट गए. बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार देर रात इसकी अधिसूचना जारी कर गई.

इसी के साथ भारत में अब कुल 28 राज्य ही रह गए. जबकि केंद्रशासित प्रदेशों की संख्या सात से बढ़कर नौ हो गई. बता दें कि भारत के इतिहास में ये पहली बार हुआ है कि जब किसी राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा गया है. इसी के साथ अब दोनों केंद्रशासित प्रदेशों में रणबीर कानून की जगह भारतीय दंड संहिता (IPC) और क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CRPC की धाराएं लागू होंगी.

वहीं जम्मू-कश्मीर में पुलिस और कानून-व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन होगी, जबकि भूमि व्यवस्था की देखरेख की जिम्मेदारी निर्वाचित सरकार के पास होगी. वहीं जम्मू-कश्मीर में सरकारी कामकाज की भाषा भी अब ऊर्दू की जगह हिंदी होगी. इसी के साथ अब केंद्रशासित जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 107 सदस्य होंगे. परिसीमन के बाद इनकी संख्या बढ़कर 114 तक हो जाएगी. वहीं, विधायिका में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लिए पहले की तरह ही 24 सीट रिक्त रखी जाएंगी.

वहीं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में मौजूदा साढ़े तीन लाख सरकारी कर्मचारी आने वाले कुछ महीने तक मौजूदा व्यवस्था के तहत ही काम करते रहेंगे. बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पांच अगस्त जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35ए के प्रावधानों को खत्म करने का ऐलान किया था. इसके मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में पुडुडुचेरी जैसी विधायिका होगी, जबकि लद्दाख बिना विधायिका के चंडीगढ़ जैसा केंद्रशासित प्रदेश होगा.

बता दें कि अब जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले 150 से ज्यादा पुराने कानून खत्म हो गए. साथ ही आधार समेत 100 से ज्यादा नए कानून लागू हो गए हैं. लागू कानूनों में आधार, मुस्लिम विवाह विच्छेद, सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, मनरेगा, भ्रष्टाचार निवारक, मुस्लिम महिला संरक्षण और शत्रु संपत्ति शामिल हैं.

केंद्र शासित प्रदेश बनते ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संसद की ओर से पारित 106 केंद्रीय कानून तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं. इसमें शिक्षा का अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानून भी शामिल हैं. साथ ही केंद्रशासित प्रदेश बनने पर जम्मू-कश्मीर के 164 प्रदेश स्तर पर बनाए गए कानून खत्म हो गए हैं, जबकि राज्य विधानसभा से पारित 166 कानूनों को पहले की तरह ही रखा गया है.

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