रेलवे ट्रेक पार करने वालों को ‘यमराज’ उठा ले जा रहे है, सावधान हो जाइऐ


पश्चिमी रेलवे ने मुंबई मे रेलवे हादसों से बचने के लिए एक मुहिम शुरु की है। जिससे लोगों को खतरे की चेतावनी दी जा रही हैं. सख्त जुर्माने के और रेलवे की तमाम चेतावनी और कार्रवाई के बावजूद भी कई लोग अपनी जिंदगी जोखिम में डालकर रेलवे ट्रेक पार करते हैं।

क्या आप भी रेलवे स्टेशन पर सीढ़ियो के बजाय रैल पट्री पार करके दूसरे प्लेटफोर्म पर जाते हैं, अगर हां तो ये खबर आपके लिए बेहद जरुरी है, क्योंकि अब सावधान होने का समय आ गया है, अगर अब आपने ट्रेक पार करके दूसरे प्लेटफोर्म पर जाने की कोशिश की तो आपको साक्षात यमराज उठा कर ले जाएगा, जी हां घबरा गए ना।
दरअसल, पश्चिमी रेलवे ने मुंबई मे रेलवे हादसों से बचने के लिए एक मुहिम शुरु की है। जिससे लोगों को खतरे की चेतावनी दी जा रही हैं. सख्त जुर्माने के और रेलवे की तमाम चेतावनी और कार्रवाई के बावजूद भी कई लोग अपनी जिंदगी जोखिम में डालकर रेलवे ट्रेक पार करते हैं।
जिसमें कई बार लोगों ने अपनी जान गवाईं है। पटरी पार करते वक्त हुए हादसों को रोकने के लिए पश्चिमी रेलवे ने अधिकारियों ने इस मुद्दे पर यात्रियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए मृत्यु के भगवान ‘यमराज’ की ड्रेस में एक आरपीएफ जवान को तैनात किया है. जो पटरी पार कर रहे यात्रियों को कंधे पर उठाकर ले जा रहा है. और साथ ही ‘यमराज’ के रूप में लोगों को सुरक्षा जागरूकता जानकारी प्रदान कर रहा है।
रेलवे का ये तरिका इतना अनोखा है कि हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर इसको काफी शेयर किया जा रहा है।
रेल मंत्रालय ने ट्वीट कर लिखा है, ‘अनाधिकृत रूप से पटरी पार ना करें, यह जानलेवा हो सकता है। अगर आप अनाधिकृत तरीके से पटरी को पार करते हैं तो सामने यमराज खड़े हैं। मुंबई में पश्चिम रेलवे द्वारा आरपीएफ के साथ मिलकर ‘यमराज’ के कैरेक्टर के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।’
बुधवार से शुरू हुई रेलवे की इस मुहिम का अच्छा रिस्पांस देखने को मिल रहा है। पहले चरण में जागरूकता अभियान सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले अंधेरी और मलाड स्टेशनों पर चलाया गया। यहां ‘यमराज’ ने सबसे ज्यादा ऐसे लोगों को पकड़ा जो जान जोखिम में डाल कर रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे।
बता दें कि एक आंकड़े के मुताबिक, पिछले साल हर दिन औसतन 7 लोगों की ट्रेन हादसों में मौत हुई। इनमें ट्रैक पार करते समय 1,476 लोग और ट्रेन से गिरने के बाद 650 की मौत हुई थी।

संपादक : केहकशा

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