अयोध्या विवाद पर 12 नवंबर के बाद आएगा फैसला ? जानें इसके पीछे के तीन कारण


फैसला आने को लेकर अयोध्या में सुरक्षा के इंतजाम भी सख्त कर दिए गए है। अयोध्या समेट यूपी के कई जिलों मे हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

इस वक्त हर किसी की निगाहें अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं, सभी इस इंतजार में बैठे है कि सुप्रीम कोर्ट कब अपना फैसला सुनाएगा, इसी बीच खबरें जोरे पर है कि एक दो दिन के अंदर अयोध्या जमीन विवाद पर फैसला आ सकता है।

फैसला आने को लेकर अयोध्या में सुरक्षा के इंतजाम भी सख्त कर दिए गए है। अयोध्या समेट यूपी के कई जिलों मे हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर दी है। इन सबको देखते हुए ये कयासबाजी है कि कोर्ट कब फैसला सुनाएगा। गुरुवार को फैसले को लेकर कयास लगते रहे और इतना ही नहीं शुक्रवार को भी फैसला आने की अटकलें लगाई जा रही हैं, मगर इन सबके बीच जो माहौल हो उसको देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने की संभावना 12 नवंबर के बाद ही बन रही हैं, और इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं।

पहला कारण- अयोध्या में इस वक्त 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा के लिए 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु जुटे हुए हैं। हालांकि परिक्रमा गुरुवार को खत्म हो चुकी है, मगर इतनी बड़ी संख्या में जुटे लोगों के वापस जाने में समय लगेगा। ऐसे में शुक्रवार को फैसला आना बहुत ही मुश्किल है क्योंकि इससे कानून व्यवस्था चरमरा सकती है।

दूसरा कारण- शुक्रवार के बाद अगले दिन यानी शनिवार को भी फैसला आना इसलिए मुश्किल है क्योंकि 9 और 10 नवंबर को देशभर में ईद ए मिलाद उन नबी का त्योहार है। ऐसे में फैसला सुनना महौल मे अशांति फैला सकता है।

तीसरा कारण- सुप्रीम कोर्ट में शनिवार और रविवार को छुट्टी होगी। सुप्रीम कोर्ट के कैलेंडर के मुताबिक सोमवार और मंगलवार को भी कोर्ट नहीं खुलेगी। ऐसे में फैसला नहीं सुनाया जा सकेगा। सोमवार को स्थानीय छुट्टी और मंगलवार को गुरुनानक जयंती की छुट्टी है।

तो अब ऐसे में फैसले का 13, 14 या 15 नवंबर हो सकता है साथ ही चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। तो ऐसे में वो अपना फैसला रिटायरमेंट से पहले ही सुनाना चाहेंगे। इसके लिए उनके पास 13, 14 और 15 नवंबर का ही समय होगा। इन सब कारणों को देखने के बाद अब आप 12 नवंबर के बाद फैसले का इंतजार कर सकते है.

संपादक : केहकशा

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