आखिर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब आगे क्या ?


सुप्रीम कोर्ट ने फैसले के बाद बाकी के पक्षकारों को पुनर्विचार याचिका यानि रिव्यू पिटीशन दाखिल करने का आधिकार है.

सुप्रीम कोर्ट शानिवार को राम जन्मभूमि विवाद मामले में अपना फैसला सुनाया है. साल 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद से इस मामले से जुड़े सभी पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया. सुप्रीम कोर्ट में तब से यह मामला लंबित था. सुप्रीम कोर्ट ने आज दिए अपने फैसले में आदेश दिया है कि मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दी जाए.सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाकर सरकार मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करे.

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की बेंच ने इस मामले में लगातार 40 दिनों पर सुनवाई की. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के अलावा इस पीठ में न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायाधीश अशोक भूषण, न्यायाधीश डीवाय चंद्रचूड़ और न्यायाधीश एस अब्दुल नजीर शामिल हैं. इस पीठ ने अपने फैसले में कहा कि उन्होंने धर्म के आधार पर अपना फैसला नहीं दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि विवादित जमीन को राम जन्म भूमि न्यास को दी जाए. ऐसे में सवाल होता हैं कि कोर्ट के इस फैसले के बाद बाकी के पक्षकारों के पास क्या विकल्प है.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले के बाद बाकी के पक्षकारों को पुनर्विचार याचिका यानि रिव्यू पिटीशन दाखिल करने का आधिकार है. इसका मतलब हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है पक्षकार कोर्ट में याचिका दें कि कोर्ट उस पर फिर से गौर करे. हालांकि कोर्ट का यह विशेषाधिकार होता है कि वह याचिका को तुंरत सुने, याचिका बंद कमरे में सुने, खुली अदालत में सुने, या याचिका खारिज करे इसका फैसला कोर्ट करता है. इतना ही नहीं कोर्ट इस मामले में मौजूदा पीठ जिसने इस मामले पर फैसला दिया था, उससे एक बड़ी पीठ का भी गठन कर सकती है.

इसके आलावा पक्षकारों के पास क्यूरेटिव पिटीशन यानि विकल्प उपचार याचिका दाखिल करने का भी अधिकार है. क्यूरेटिव पिटीशन रिव्यू पिटीशन से अलग होती है. यह फैसले की बजाए उन मुद्दों या विषयों को रेखाकिंत किया जाता है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है. पक्षकारों के पास यह दूसरा और अंतिम विकल्प होता है. कोर्च इस याचिका को खारिज भी कर सकती है और इस पर सुनवाई भी. लेकिन अगर कोर्ट द्वार इस याचिका को खारिज किया जाता है तो यह फैसला अंतिम होगा जिसे सबको मामना होगा.

सम्पादक : शिवम् गुप्ता

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