मोदी सरकार की कोसिस लाएगी 27 नए बिल, आज से हुआ संसद का शीतकालीन सत्र सुरु


संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो जाएगा. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकार्य का ये पहला शीतकालीन सत्र 13 दिसंबर तक चलेगा. इस सत्र में केंद्र सरकार कई नए बिल पेश करेगी. जिसमें नागरिकता (संशोधन) विधेयक समेत 27 नए बिल शामिल हैं. वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगी. विपक्षी दल देश में आर्थिक सुस्ती और कश्मीर में मौजूदा हालात को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी, वहीं सरकार कई नए पुराने बिल पास करवाने की कोशिश करेगी.

शीतकालीन सत्र के दौरान मोदी सरकार जिन नए बिलों को पास करने की कोशिश करेगी उनमें द सिटीजनशिप बिल, द नेशनल रिवर गंगा बिल, टैक्सेशन लॉ बिल, प्रोहिबिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट बिल, पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी बिल, एयरक्राफ्ट बिल, कंपनीज बिल, दी कंपटीशन बिल, इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बिल, द माइन्स एंड मिनिरल बिल, एंटी मैरिटाइम पायरेसी बिल, द इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विस सेंटर अथॉरिटी बिल, द मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी बिल, द हेल्थ केयर सर्विस पर्सनल एंड क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट बिल को पास करने की कोशिश करेगी.

इसके अलावा सरकार जिन बिल को पास करने की कोशिश करेगी उनमें द असिस्टेड रीप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी बिल, द नेशनल पुलिस यूनिवर्सिटी बिल, द डिजास्टर मैनेजमेंट बिल, द इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल, द माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज डेवलपमेंट बिल, द कॉन्स्टिट्यूशन ऑर्डर बिल, द जूविनाइल जस्टिस अमेंडमेंट बिल, द रीसाइक्लिंग ऑफ शिप्स बिल, द सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी बिल, द पर्सनल डाटा प्रोटक्शन बिल, द मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन बिल, द आर्म्स एक्ट बिल भी शामिल हैं.

बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार इन नए बिलों के अलावा पहले से लंबित पड़े दो बिल और राज्यसभा में पहले से लंबित 10 बिलों को इसी सत्र में पास करवाने की कोशिश करेगी. शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार जिन नए बिलों को पास करने की कोशिश करेगी उनमें नागरिकता बिल भी शामिल है. बता दें कि नागरिकता बिल का उद्देश्य पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम प्रवासियों को राष्ट्रीयता देना है. मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल में इस विधेयक को पेश किया था लेकिन इस बिल को पारित नहीं करा पाई थी.

बता दें कि संशोधन विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताड़ित होने के चलते अपना देश छोड़कर भारत आए हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध एवं पारसी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है. असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक का विरोध हो रहा है, जहां अधिकतर हिंदू प्रवासी रह रहे हैं.

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