देश के 47वें मुख्य न्यायधीश बने जस्टिस बोबडे, दादा और पिता थे वकील

भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद ए बोबडे को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने सोमवार सुबह राष्ट्रपति भवन में शपथ दिलाई. मुख्य न्यायाधीश बोबडे का कार्यकाल 18 महीनों से थोड़ा अधिक होगा. देश के मुख्य न्यायधीश बनने से पहले बोबडे सुप्रीम कोर्ट की उस बेंच का हिस्सा थे, जिन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद टाइटल सूट पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया.

मुख्य न्यायाधीश के रूप में सीजेआई बोबडे को सात न्यायाधीशों वाली पीठ का गठन करना होगा जो सबरीमाला पर महिलाओं के प्रवेश मामले में सुनवाई करेगा. चीफ जस्टिस बोबडे सबरीमाला की पांच न्यायाधीशों की पीठ का हिस्सा नहीं थे.

जस्टिस बोबड़े को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवा देने के बाद अप्रैल 2012 में सर्वोच्च न्यायालय में स्थान मिला था. जस्टिस बोबड़े महाराष्ट्र से हैं और उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय में कानून की पढाई की है. उनके दादा और पिता दोनों वकील थे. बोबडे ने 1978 में बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष कानून का अभ्यास शुरू किया.

1956 में जन्मे जस्टिस बोबडे को 1998 में एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया और मार्च 2000 में एक अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उच्च न्यायालय भेजा गया. जस्टिस बोबडे ने शीर्ष अदालत में अहम भूमिका निभाई है. मई 2019 में उन्होंने CJI के कार्यालय के एक कर्मचारी सदस्य द्वारा CJI गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को सुनने वाली तीन-न्यायाधीश समिति का नेतृत्व किया.

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