सियाचिन में भारी भूस्खलन के चलते 4 जवान सही और 2 घायल


उत्तरी सियाचिन ग्लेशियर में सोमवार को आए जबरदस्त हिमस्खलन की चपेट में आने से चार जवान शहीद हो गए. वहीं दो पोर्टरों की भी इस घटना में मौत हो गई. साथ ही दो अन्य जवानों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है. जिन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है. बता दें कि सियाचिन ग्लेशियर दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है.

इस घटना में मारे गए दो लोग बोझा ढोने का काम किया करते थे. भारतीय सेना का कहना है कि दिन में सियाचिन ग्लेशियर के उत्तरी सेक्टर में 19 हजार फुट की ऊंचाई पर आठ लोग गश्ती दल में शामिल थे. यह हिमस्खलन सोमवार करीब तीन बजे हुआ. सेना ने अपने बयान में कहा है कि इस घटना के बाद तुरंत ही हिमस्खलन बचाव टीम को घटनास्थल पर भेजा गया.

जिसने सभी आठ लोगों को बर्फ में से निकाला. सभी को हेलिकॉप्टर के जरिए सेना अस्पताल भेजा गया है. जिनमें सात की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है. इस घटना में शहीद हुए जवान काफी देर तक बर्फ में दबे रहे जिससे चलते उन्होंने दम तोड़ दिया. सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोलिंग ड्यूटी पर तैनात छह डोगरा बटालियन के जवान काजी और बाना पोस्ट के बीच हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे.

बता दें कि ये कोई पहली घटना नहीं जब कि हिमस्खलन की चपेट में आऩे से जवानों की मौत हुई है. इससे पहले 10 नवंबर को भी कुपवाड़ा में हिमस्खलन की चपेट में आकर दो सैन्य पोर्टरों की मौत हो गई. वहीं 31 मार्च, 2019 को भी कुपवाड़ा में हिमस्खलन में दबकर मथुरा के हवलदार सत्यवीर सिंह शहीद हो गए थे.

इसी साल 3 मार्च को कारगिल के बटालिक सेक्टर में हिमस्खलन में पंजाब के नायक कुलदीप सिंह शहीद हो गए थे. इसी साल 8 फरवरी को जवाहर टनल पोस्ट के पास भी हिमस्खलर् हुआ था जिसमें 10 पुलिसकर्मी लापता हो गए जबकि 8 को बचा लिया गया था.

साल 2016 में 3 फरवरी हिमस्खलन की चपेट में आने से 10 जवान शहीद हो गए थे. हालांकि बर्फ में दबे लायंस नायक हनुमनथप्पा को छह दिन बाद निकाला गया, लेकिन 11 फरवरी को उन्होंने दम तोड़ दिया. साल 2012 में 16 मार्च को सियाचिन में बर्फ में दबकर छह जवान शहीद हो गया था.

बता दें कि दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन में भारत ने 1984 में सेना की तैनाती शुरू की थी. इस दौरान पाकिस्तान की ओर से अपने सैनिकों को भेजकर यहां कब्जे की कोशिश की गई थी. इसके बाद यहां जवानों की तैनाती रही है. आंकड़ों के मुताबिक, सियाचिन में हिमस्खलन या प्रतिकूल मौसम की वजह से हर महीने औसतन दो जवानों की मौत हो जाती है. साल 1984 से लेकर अब तक 900 से अधिक जवान शहीद हो चुके हैं. कराकोरम क्षेत्र में लगभग 20 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित सियाचिन ग्लेशियर में तैनात जवान दुश्मनों की गोलीबारी में कम हिमस्खलन और अन्य मौसमी घटनाओं में ज्यादा मारे जाते हैं.

hi_INHindi
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