ग्वालियर में चल रहा था दो साल से नकली पुलिस स्टेशन, जब पता चला तो हुआ ये…


अभी तक आपने ऐसी खबरें सुनी होंगी जहां पुलिसकर्मियों की वर्दी पहनकर बदमाशों ने लोगों को लूटा हो. लेकिन मध्यप्रदेश में बदमाशों ने एक कदम आगे बढ़ते हुए एक नकली पुलिस थाना ही खोल दिया. इतना ही नहीं इन लोगों ने खुद को पुलिस कर्मी बतार लोगों की शिकायतें भी लिखी. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कुछ भ्रष्ट पुलिस कर्मियों की मदद से यह थाना साल 2017 से चल रहा था लेकिन आखिरकार गुरूवार को इस थाने के चार नकली पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर मामले का भंडाफोड़ किया गया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक,मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कथित रूप से चलाए जा रहे इस नकली पुलिस स्टेशन का भंडाफोड़ साल 2018 में किया गया था, लेकिन कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के कारण मामले की फाइलें आगे नहीं भेजी गईं. जिसके कारण यह लोग पकड़ में नहीं आए.

व्यापम घोटाले को उजागर करने वाले आशीष चतुर्वेदी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में दावा किया,’साल 2017 में ग्वालियर मेले के दौरान एक सीनियर पुलिस अधिकारी जब सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए इलाके के दौरे पर आया था उस दौरान इन चारों लोगों ने उस अधिकारी जिस तरह से सेल्यूट किया उससे सीनियर अधिकारी को शक हुआ और जब इन चारों लोगों से पूछताछ की गई तब इन लोगों ने जो जवाब दिए उसे सुनकर यह अधिकारी भी दंग रह गया.’

आशीष चतुर्वेदी ने आगे कहा,’इस पुलिस अधिकारी के सामने इन चारों में से दो ने अपने आपको को मजदूर बताया, एक ने खुद को पेंटर जबकि चौथे व्यक्ति ने खुद को सब्जी विक्रेता बनाया. हालांकि इस मामले में साल 2018 में डीएसपी लेवल के एक अधिकारी ने जांच करने के बाद इन लोगों को नकली पुलिस कर्मी पाया था और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की बात अपनी रिपोर्ट में कही थी लेकिन इन लोगों के खिलाफ किसी तरह की कोई जांच नहीं की गई.’

गुरुवार को ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के एसपी क्राइम ब्रांच पंकज पांडे ने इन नकली पुलिस कर्मियों के खिलाफ शिकायतें मिलने के बाद कार्रवाई की और उन चार आरोपियों की पहचान की जो पुलिस कर्मी बनकर काम कर रहे थे और जबरन वसूली गतिविधियों में शामिल थे. चारों आरोपियों की पहचान रिंकेश, सुरेंद्र, कमला और शिवम के रूप में हुई है.

पुलिस के अनुसार, खाकी वर्दी पहने चार लोग इलाके के सब्जी व्रिकेता, रास्ते से गुजरने वाले ट्रक ड्राइवर से जबरन बसूली करते थे और लोगों को डराने के लिए फोन पर थाने के पुलिस अधिकारी होने का नाटक करते थे.

क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पंकज पांडे ने कहा,’हमें यह पता लगाना बाकी है कि इन चार लोगों को या तो किसी अन्य उद्देश्य के लिए पुलिस द्वारा काम पर रखा गया था या वे नगर निगम की रक्षा समिति से थे.’

hi_INHindi
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