आयुष्मान योजना का लाभ लेने को तरस रहे गरीब परिवार


उषा देवी पिछले दो सालों से कैंसर से ग्रसित हैं ऊषा की इस बीमारी में लाखों रूपये खर्च हो होने बाद भी जब कोई फायदा नहीं मिला. तो लोगों ने भी आर्थिक मदद करने से अब हाथ पीछे खींच लिए है.

आपको बता दें कि ऊषा का नाम सामाजिक, आर्थिक जनगणना 2011 की सूची में दर्ज है और उनके पास गरीबी रेखा से नीचे का राशन कार्ड भी है. इसके साथ ही आयुष्मान भारत की सूची में उनका नाम शामिल है, लेकिन आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना का कार्ड न मिलने की वजह से उन्हें किसी भी स्वास्थ्य संस्था में इलाज का नि:शुल्क लाभ नहीं मिल पा रहा है.


स्थानीय लोगों से पता चला है कि ऊषा ही एकमात्र महिला नहीं जिन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हुई है बल्कि सैंकड़ों गरीब परिवार ऐसी ही गंभीर बीमारी से ग्रस्त है.

आर्थिक अभाव के कारण तोड़ा दम

इसी वार्ड के रहने वाले अवधेश ने बताया कि उनके पिता का ठीक प्रकार से इलाज न मिलने के कारण दस दिन पहले निधन हो गया. अबधेश ने आगे बताया कि उनके पिता रामजी बहुत दिनों से बीमार चल रहे थे. उनके पिता रामजी अपने जीते-जीते आयुष्मान कार्ड के लिए कार्यालयों के चक्कर काटते रहे, लेकिन उनका कार्ड नहीं बना.
सरकारी अस्पतालों में किसी कार्ड की मान्यता नहीं होने के कारण अस्पताल से बगैर इलाज के लौटा दिया जा रहा है. उनका कहना है कि यह योजना कागजों में चल रही हैं.

पढ़िए कितनों का नाम है लिस्ट में और कितनों को मिला है लाभ

वार्ड संख्या 43 में सामाजिक, आर्थिक जनगणना सूची में 5,810 लोगों को गरीबी रेखा के नीचे रखा गया. इनमें से मुश्किल से 400 लोग ही आयुष्मान भारत मिशन की योजना के लिस्ट में शामिल हो पाए. दुर्भाग्य है कि इन 400 लोगों में भी मुश्किल से 250 लोगों को ही आयुष्मान कार्ड का लाभ मिल पाया है. लोग बता रहे हैं कि जिनके पास आयुष्मान भारत मिशन का स्वास्थ्य कार्ड है उनमें भी कई लोगों को अस्पताल वाले लाभ नहीं दे रहे हैं. कार्ड धारकों को एक के बाद दूसरा बहाना बताकर अस्पतालों से भगा दिया जा रहा है।

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