हाइकिंग रास्तों से निकलकर कीजिएगा अब ट्रीकिंग रास्तों को सफर


अगर आपको भीड़ से अलग हटकर खतरों का सामना करना अच्छा लगता है तो ट्रेकिंग उन सभी में से एक और बेहतरीन विकल्प है जो आपके सफर को और रोमांचित कर देती है. जी हां, अजनबी रास्तों पर खतरों से निकलकर ट्रेकिंग करने का मजा जरूर उठाना चाहिए. शुरुआत में इसके बारे में आपको थोड़ी घबराहट हो सकती है.

लेकिन ट्रेकिंग करने से पहले आपको कुछ तैयारियां करनी होंगी, जो आपके सफर को बेहद ही रोमांचक बना सकती है. यहां तक कि आप इसे अपने पूरे परिवार के साथ भी एन्जॉय कर सकते हैं. आइए नेशनल जियोग्राफिक ट्रेवल इंडिया के हवाले से जानते हैं कि ट्रेकिंग करने से पहले किन चीजें का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

ट्रेकिंग के लिए चुने मन पसंद जगह

ट्रेकिंग का अर्थ होता है पहाड़ी रास्तों से पैदल चलकर सफ़र करते हैं. और इसमें आप अपने मन मुताबिक़ रास्तों का चुनाव कर सकते हैं. आप अपने मन मुताबिक, हरे पेड़ पौधों से भरे रास्ते या किसी फिशिंग ट्रिप और कैंप को लेकर ट्रेकिंग का प्लान बना सकते हैं.

अपने आने-जाने वाले समय को करें निश्चित

ट्रेकिंग पर जाते समय पहले अपने समय को तय कर लेना चाहिए. कि आप कितने दिनों के लिए बाहर जा रहे हैं. आपको बता दें कि, कुछ लोग एक दिन की ट्रेकिंग में ही हार मान लेते हैं और थकहार कर वापस लौट आते हैं तो वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग कई दिनों तक ट्रेकिंग करते रहते हैं. ऐसे लोग सप्ताह भर यहां तक कि एक या दो महीने तक जंगलों, खेल खलिहानों और पहाड़ी रास्तों पर आसानी से ट्रेकिंग में ज्यादा समय बिताने वाले लोगों को उसी हिसाब से सामान अपने साथ में रखकर चलें. जब आपने ट्रेकिंग पर जाने का मन बना ही लिया है. तो खुद को समझ लेना बेहद जरूरी है कि आप कहां से कहां तक कितना पैदल चलकर रास्तों को नाप सकते हैं. इसके लिए आप कितने फिट हैं ये जानना आपके लिए बेहद जरूरी है.

ट्रीकिंग और हाइकिंग में फर्क

हाइक उन रास्तों की यात्रा है जिनसे हम पहले भी गुजर चुके हैं या जिन रास्तों को हम पहले भी जानते हैं. और वहीं ट्रीकिंग का अर्थ हाइकिंग के बिल्कुल उलट होता है. यानि कि, ट्रीकिंग में आप एक अनजाने रास्ते का सफ़र तय करते हैं. जिसमें अलग-अलग रास्ते रोमांच और जोखिम भरे हो सकते हैं.

hi_INHindi
hi_INHindi
Share via
Copy link
Powered by Social Snap