हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है प्राकृतिक विटामिन डी को लेना


शरीर को स्वस्थ तभी रखा जा सकता है जब हड्डियां मजबूत हो, हड्डियों को मजबूत रखने के लिए आपके लिए सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाली बात यह है कि, आपको सुबह-सुबह प्राकृतिक विटामिन-डी लेनी होगी. और वो दिल्ली जैसे महानगर में मुमकिन ही नहीं है क्योंकि आसमान में छाईं प्रदूषण की परत सूर्य की किरणों को आने से पहले ही रोक देता है जिससे भरपूर तरीके से विटामिन-डी किसी के शरीर पर नहीं पहुंच पाती है और विटामिन-डी की कमी से ही शरीर की हड्डियां मजबूत नहीं हो पाती है. विटामिन डी की कमी को पूरा करने को लेकर कई शोध किए गए है.

आमतौर पर बताया जाता है कि 15 मिनट की धूप लेने से ही शरीर में विटमिन डी की कमी को पूरा किया जा सकता है. अगला प्रश्न यह है कि दिन का कौन सा पहर सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने का सबसे उपयुक्त होता है.

विटामिन-डी को कैसे करें पूरा

आपको बता दें कि जब आप विटामिन डी ले रहे हो उस वक्त आपकी त्वचा पर किसी भी प्रकार का लोशन नहीं लगा होना चाहिए. और सन बाथ करने का समय सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे के बीच का है. इस समय आपके शरीर की त्वचा को विटामिन डी की कमी पूरी हो जाती है. दिल्ली जैसे शहर, जहां प्रदूषण के कारण लोगों तक धूप नहीं पहुंच पाती है, वहां लोग डेयरी प्रोडक्ट्स और खान-पान के जरिए विटामिन डी का सेवन कर सकते हैं. महिलाओं में विशेष रूप से प्री-मेनोपॉजल और पोस्ट-मेनोपॉजल की श्रेणी की महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोमलेशिया होने की संभावना होती है.

विटामिन डी की कमी से बच्चों में रिकेट्स की समस्या

सर्दी से बचने के लिए या धूल मिट्टी से खुद को बचाने के लिए महिलाएं खुद को पूरा ढकने से बचना चाहिए. क्योंकि पूरा ढकने से महिलाओं के शरीर के अंदर धूप न पहुंच पाने की वजह से विटामिन-डी का मात्रा बहुत कम हो जाती है. जिससे बच्चों में विटामिन डी की कमी से रिकेट्स की समस्या होने लगती है. बच्चों को शुरुआत में ही पर्याप्त आहार के साथ-साथ अच्छी धूप का सेवन कराना आवश्यक होता है. बच्चों को खास कर उन बच्चों को जिन्होंने मां का दूध पीना छोड़ दिया है, उन्हें विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन कराना आवश्यक है.

वहीं सर्दियों में हड्डियों को स्वस्थ रखने में अच्छी मात्रा में कसरत करने से भी फायदा मिलता है. कसरत से हड्डियों का घनत्व बना रहता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है.

hi_INHindi
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