माउंट एवरेस्ट पर क्या है मौत की वजहें


विश्व में सबसे पहले एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे ने कभी ये सोचा नहीं था कि वापस आकर लोगों के लिए मिसाल बन जाएंगे.

बताया जाता है कि एवरेस्ट की चढ़ाई करना बेहद कठिन है. लेकिन फिर भी लोग अपना हौसला बुलंद करके एवरेस्ट की तरफ रूख करते हैं. माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना कुछ लोगों का सपना होता है जुनून होता है, पागलपन होता है लेकिन कहा जाता है जुनून, पागलपन ही इन्सान को उसके लक्ष्य तक यानि की माउंट एवरेस्ट तक पहुंचा पाते हैं.

एवरेस्ट पर चढ़ाई दुनिया के सबसे कठिन और संघर्षपूर्ण कामों में से एक है. आपको बता दें कि, एवरेस्ट पर चढ़ने के पहले प्रयास से लेकर अब तक 308 से ज्यादा पर्वतारोहियों की मौत हो चुकी है. आइए आपको पहली चढ़ाई से लेकर अब तक के पर्वतारोहियों की हुई मौत के बारें में बताते हैं.

एवरेस्ट पर हिमस्खलन है मौत का सबसे बड़ा कारण
1970 में 6 मौतें, 1974 में 6 मौतें, 1996 में 12 मौतें, 2014 में 16 मौतें, 2015 में 22 मौतें बर्फीले तूफान से हुईं है.

एवरेस्ट पर मौतें की वजह
एवलांच- 68, गिरने से- 67, एक्सपोजर- 27, एल्टीट्यूड सिकनेस- 21, दिल का दौरा- 11, थकान- 15, अन्य- 83

एवरेस्ट के किस हिस्से में कितनी मौतें
चोटी के पास (8848 मीटर), 50 प्रतिशत गिरने से, 10 प्रतिशत दिमाग के सूजने से, 40 प्रतिशत अज्ञात कारणों से, साउथ कॉलम (7906 मीटर), 55.6 प्रतिशत एक्सपोजर से, 11.1 प्रतिशत थकान और 22, 22.2 प्रतिशत गिरने से 42.8 प्रतिशत एवलांच से, 14.3 प्रतिशत गिरने से, 14.3 प्रतिशत बर्फ गिरने से, 14.3 प्रतिशत नुकीले पत्थरों से, 14.3 प्रतिशत अज्ञात कारणों से लोगों की मौत हुई है.

डेथ जोन
एवरेस्ट चढ़ने के दौरान सबसे ज्यादा मौतें 8000 मीटर (26,000 फीट) और उसके ऊपर से शुरू होती हैं. इसे डेथ जोन कहा जाता है.

पर्वतारोहियों के शव
एवरेस्ट पर जान गंवा देने वाले पर्वतारोहियों के शव को वापस लाना बेहद मुश्किल होता है और काफी ज्यादा खर्चीला भी, इसलिए शव को वहीं छोड़ दिया जाता है. पर्वतारोहियों के शव से ही एवरेस्ट पर चढ़ने के रास्ते का पता चलता है. इन शवों को देखकर नए पर्वतारोहियों को सही रास्ते का पता चल पाता है।


सालों नहीं खराब होते हैं पर्वतारोहियों के शव
एवरेस्ट पर करीब 98 सालों से लाशें पड़ी हुई हैं. लेकिन ये सड़ती नहीं हैं. क्योंकि यहां का तापमान, एवरेस्ट का न्यूनतम तापमान 16 डिग्री से लेकर 40 डिग्री तक रहता है. इस तापमान में मरे हुए पर्वतारोहियों के शव खराब नहीं होते। वे सालों साल उसी अवस्था में रहते हैं।


सालों नहीं खराब होते हैं पर्वतारोहियों के शव
एवरेस्ट पर करीब 98 सालों से लाशें पड़ी हुई हैं. लेकिन ये सड़ती नहीं हैं. क्योंकि यहां का तापमान, एवरेस्ट का न्यूनतम तापमान 16 डिग्री से लेकर 40 डिग्री तक रहता है.
इस तापमान में मरे हुए पर्वतारोहियों के शव खराब नहीं होते। वे सालों साल उसी अवस्था में रहते हैं।

hi_INHindi
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