राममंदिर जाएं घूमने तो इन जगहों पर जाना न भूलें सैलानी


अयोध्या राम जन्मभूमि का फैसला आने के बाद सैलानियों की संख्या बढ़ने की संभावना है, ऐसे में उन्हें गाइडेन्स की जरूरत होगी कि वो राम मंदिर में किस जगह पर जाएं. अगर आप भी जाना चाहते है तो हम आपको ऐसे खास स्‍थानों के बारे में बता रहे हैं, जहां आपको एक बार जरूर जाना चाहिए..

हनुमान गढ़ी
अयोध्या में कई भव्य धार्मिक स्थान हैं और उन सब में हनुमान गढ़ी सबसे अहम है हनुमान जी को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 10वीं सदी में हुआ था. पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक जाने के लिए आपको 76 सीढ़ियां पार करनी पड़ेंगी.

कनक भवन
कनक भवन को सोने का घर के नाम से भी जाना जाता है. यहां भगवान राम और सीता की सोने के मुकुट वाली मूर्तियां हैं. यह काफी भव्य और सुंदर महल है. माना जाता है कि विवाह के उपरांत माता कौशल्‍या भगवान राम की पत्‍नी सीता को य‍ह मुंह दिखाई में दिया था.

राम की पैडी
राम की पैड़ी सरयू नदी के किनारे स्थित घाटों की एक शृंखला है. पूर्णिमा के दिन इस स्थान की सुन्दरता देखते बनती है. श्रद्धालुओं में ऐसी मान्यता है कि यहां स्नान करने से पाप धुल जाते हैं .

दशरथ महल
शहर के बीच में स्थित दशरथ महल वह जगह है.जिसके बारे में कहा जाता है कि यह भगवान राम के पिता और अयोध्या के राजा दशरथ का निवास था. यह एक भव्य महल है जिसको अच्छी तरह से सजाया गया है.

गुलाबबाड़ी
शुजाउद्दौला के मकबरे के चारों तरफ फैले इस गुलाब के बगीचे में तरह-तरह के गुलाब के फूल देखने को मिलेंगे. इस स्थान को गुलाबबाड़ी के बगीचे के अलावा यहां मौजूद इमामबाड़ा और मस्जिद के लिए भी जाना जाता है.

मणि पर्वत
मणि पर्वत का खास धार्मिक और पौराणिक महत्व है. मान्यता है कि जब हनुमान लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी का पहाड़ लेकर आ रहे थे, तब पर्वत का एक भाग अयोध्या में गिर गया था, जिसे अब मणि पर्वत के नाम से जाना जाता है. मणि पर्वत से पूरे शहर के मनोरम दृश्य के अलावा यहां सम्राट अशोक द्वारा निर्मित स्तूप एवं बौद्ध मठ को भी देख सकते हैं.
माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान राम के बेटे कुश ने करवाया था. यह भगवान शिव को समर्पित मंदिर है, जहां शिवरात्रि या अन्य कोई शिव पूजा के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.

सीता की रसोई
वास्तव में सीता की रसोई, कोई रसोई घर नहीं है बल्कि यह एक मंदिर है. माना जाता है कि माता सीता की रसोई यहीं पर थी। मंदिर के एक कोने में पुराने रसोई घर का एक मॉडल है जहां प्राचीन, बर्तन आदि का नमूना है. मंदिर परिसर के दूसरे किनारे में चारों भाई राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्‍न एवं उनकी पत्नियों की मूर्तियां हैं.

सुग्रीव महल
मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग में बना ‘सुग्रीव किला’ अयोध्या का ऐतिहासिक मंदिर है जिसके दर्शन करने से सभी शत्रु समाप्त हो जाते हैं. माना जाता हैं कि लंका विजय के बाद जब भगवान राम सुग्रीव के साथ अयोध्या आए, तब उन्होंने सुग्रीव को निवास के लिए मुक्ता और वैदूर्य मणियों से युक्त दिव्य महल दिया था, जिसे ‘सुग्रीव किला’ के नाम से जाना जाता है. आज भी यह किला अपनी आध्यात्मिकता के लिए प्रसिद्ध हैं.

तुलसी स्मारक
तुलसी स्मारक भवन गोस्वामी तुलसीदास जी की स्मृति में बनाया गया है. रामचरित मानस की रचना करने के लिए उन्हें सर्वाधिक याद किया जाता है, यह भी माना जाता है कि उन्होंने हनुमान चालीसा की भी रचना की है।

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