पाकिस्तान में किया जाता है हिन्दूओं के साथ भेदभाव शोएब अख्तर ने किया खुलासा


पाकिस्तान के तेज गेंदबाज रह चुके शोएब अख्तर ने पाकिस्तान में रह रहे हिन्दू खिलाड़ी से व्यवहार को लेकर बड़ा खुलासा किया किया है.

शोएब अख्तर ने यह खुलासा एक टीवी शो में किया है. उन्होंने इस शो में बताया कि उनके साथी पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया के साथ हमारी ही टीम के दूसरे खिलाड़ियों का व्यवहार गंदा था. उनका कहना है हिन्दू होने पर उससे भेदभाव किया जाता था.

हिंदूओं के साथ नहीं खाते है खाना
शोएब अख्तर ने बताया कि हमारी टीम के मुस्लिम खिलाड़ी को हिन्दू साथी के साथ खाना खाना भी पसंद नहीं था. आपको बता दें, शोएब अख्तर का ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वहीं भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी इस वीडियो को ट्वीट किया है.

कौन किसके खिलाफ
पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज शोएब अख्तर का यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है जब देश में नागरिकता संशोधन कानून पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. दरअसल, नागरिकता कानून को लेकर प्रर्दशनकारियों द्वारा यह कहा गया कि यह कानून भारत के मुस्लमानों के खिलाफ है. वहीं, सरकार यह कह चुकी है कि यह कानून किसी भी भारतीय नागरिक के खिलाफ नहीं है. यह कानून नागरिकता देने वाला है, नागरिकता लेने वाला नहीं.

हिंदू खिलाड़ी ने पाकिस्तान को दिलाई थी जीत
अख्तर ने चैट शो में कहा, ‘मेरे करियर में झगड़ा जो दो-तीन बंदों से हुआ. जब उन्होंने करांची, पेशावर और पंजाब की बात की तो मुझे बहुत गर्मी आती थी. यार कोई हिन्दू है न, वो खेलेगा. उसी हिन्दू ने टेस्ट सीरीज जिताई.’

दानिश के साथ हुई नाइंसाफी
शोएब के इतना कहते ही चैट शो में मौजूद डॉक्टर रियाज ने कहा, दानिश कनेरिया ने जिताई. इसके बाद शोएब ने कहा, ‘बात खुल जाएगी. लेकिन, बता दूं कि कुछ प्लेयर्स ने मुझसे कहा कि ये (दानिश) यहां से खाना क्यों ले रहा है. मैंने उनसे कहा कि मैं तुम्हें यहां से उठाकर बाहर फेंक दूंगा. कप्तान होगे, तुम अपने घर के. वो तुम्हें 6-6 विकेट लेकर दे रहा है. इंग्लैंड में दानिश और शमी ने ही हमें सीरीज जिताई थी.’ शोएब ने कहा, ‘दानिश हिंदू था. इसलिए उसके साथ नाइंसाफी हुई. कुछ प्लेयर्स को तो इस बात पर ऐतराज था कि वो हमारे साथ खाना क्यों खाता है?’

युसूफ को करना पड़ा था धर्म परिवर्तन
इसी चैट शो में मौजूद राशिद लतीफ ने कहा कि यूसुफ योहाना को भी ड्रेसिंग रूम में काफी तंग किया जाता था क्योंकि वो ईसाई थे. जब तक वह इस धर्म में थे उन्हें परेशान किया जाता रहा. हालांकि बाद में उन्होंने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया और मोहम्मद यूसुफ बन गए.

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