इस साल चमकी जैसे खतरनाक बुखार ने ली 75 फीसदी लोगों की जान


लेकिन साल 2019 में भारत को कई गंभीर बीमारियों ने तबाही मचा दी. चमकी बुखार से लेकर निपाह वायरस जैसी खतरनाक बीमारियों से देश को कई स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

इन बीमारियों की वजह से न जाने कितने लोगों की जान चली गई. आइए एक नजर उन चुनौतियों पर डालते हैं जिससे देश को गुजरना पड़ा.

निपाह वायरस ने ली 17 लोगों की जान
साल 2019 में निपाह वायरस ने करीब 17 लोगों की जान ले ली. इस वायरस के चपेट में आने से 2018 में भी 13 लोगों की मौत हो गई थी। निपाह एक ऐसा वायरस है जो जानवर से इंसान में फैलता है. चमगादड़ जब कोई फल खाते हैं तो उसमें अपना लार छोड़ देते हैं, जिससे फल संक्रमित हो जाता है. जब इस संक्रमित फल को कोई इंसान खा लेता है तो वो निपाह वायरस के चपेट में आ जाता है. निपाह प्रभावित लोगों या जानवरों के लिए अभी तक कोई इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है. इस संक्रमण के लिए सिर्फ लक्षणों और सपॉर्टिव केयर को ध्यान में रखकर ही उपचार किया जाता है. भारत में इस संक्रमण से औसत मृत्यु दर 75 फीसदी से ज्यादा रही है.

चमकी बुखार
चमकी बुखार का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर होता है. इस बीमारी को विज्ञान की भाषा में एक्यूट इनसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहा जाता है. साल 2019 में इस बीमारी ने बिहार में तबाही मचा दी. इस बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या 175 के पार पहुंच गई थी. बिहार में मानसून के दस्तक के बाद इस बुखार का प्रभआव कम हो गया. इस बुखार में बच्चे को लगातार तेज बुखार रहता है. बदन में ऐंठन होती है. बच्चे दांत पर दांत चढ़ाए रहते हैं, कमजोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता है. यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है. इससे उसे झटके लगने लगते हैं. इसकी वजह से सेंट्रल नर्वस सिस्टम खराब हो जाता है.

वायु प्रदूषण
वैसे तो वायु प्रदूषण की समस्या से पूरा देश परेशान है लेकिन इस प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर देश की राजधानी दिल्ली में देखने को मिलता है. विश्व में लगभग 70 लाख लोग हर साल कैंसर, स्ट्रोक, हृदय और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों की चपेट में आकर मर जाते हैं.इसकी सबसे बड़ी वजह प्रदूषित हो रखा वातावरण है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में दस में से नौ लोग हर दिन प्रदूषित हवा में सांस ले रहे है।

hi_INHindi
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