मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के पैर में पाया जाने वाला प्रोटीन हो रहा है उनके लिए वरदान साबित


हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि मलेरिया के मच्छरों के पैर में पाया जाने वाला प्रोटीन ही इनमें कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोधी क्षमता विकसित करने में मदद कर रहा है. यही वजह है कि अब इन मच्छरों पर कीटनाशक भी फेल हो चुके है. प्रोटीन के चलते मच्छरों की इम्युनिटी इतनी ज्यादा स्ट्रांग हो चुकी है कि अब कीटनाशक के प्रयोग के बावजूद वो मर नहीं रहे हैं.

हर साल मलेरिया से होती है चार लाख लोगों की मौत

लिवरपूल स्कूल ऑफ़ ट्रॉपिकल मेडिसिन (LSTM)) के शोधकर्ताओं की एक टीम ने ये शोध किया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन ने मलेरिया के खिलाफ जंग के लिए नई रणनीति बनाने का रास्ता खोल दिया है. मलेरिया के कारण हर साल दुनियाभर में लगभग चार लाख लोगों की मौत हो जाती है. नेचर जर्नल में छपे ब्रिटेन के लीवरपुल स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के इस शोध के मुताबिक, कीटनाशक प्रतिरोधी वाले दो मलेरिया के मच्छरों की प्रजाति, एनोफिलिस गाम्बिया और एनोफिल्स कोलुजी के पैरों में ‘एसएपी2 प्रोटीन’ होता है जिसके कारण मॉस्किटो कायल आदि का इन पर कोई असर नहीं होता है और ये इस तरह के कीटनाशकों के अभ्यस्त हो जाते हैं.

पाइरेथ्रोइड्स कीटनाशक
रिसर्च के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रोटीन (SAP2) मच्छरों की प्रतिरोधी आबादी में काफी ज्यादा मात्रा में पाया गया. पाइरेथ्रोइड्स के संपर्क में आने के बाद इसका लेवल और भी ज्यादा बढ़ गया. बता दें कि पाइरेथ्रोइड्स एक प्रकार का कीटनाशक है जिसका इस्तेमाल सभी तरह की मच्छरदानी में किया जाता है.

मच्छरों की इम्युनिटी पॉवर हो जाती है कमजोर
रिसर्च के आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा कि जब इस प्रोटीन को पैदा करने वाले जीन में आंशिक रूप से कोई खराबी आ जाती है तो मच्छर पाइरेथ्रोइड्स के प्रति अपनी इम्युनिटी खो देते हैं. यानी कि उनकी इम्युनिटी पॉवर कमजोर हो जाती है. ऐसे में कीटनाशक मच्छरों पर असरदार साबित होता है.

hi_INHindi
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