गठिया बाई रोग होने का क्या है सबसे बड़ा कारण


जैसे-जैसे उम्र ढलती जाती है वैसे ही बीमारियों का अंबार लगता जाता है. इन्हीं बीमारियों में एक बीमारी है गठिया. जिससे लोग अपनी उम्र से ज्यादा उम्र के दिखने लगते हैं कहीं पर जल्दी से उठ बैठ नहीं सकते हैं परेशानी तब बढ़ जाती है इनकी जब इलाज के बाद आराम नहीं मिलता है.

क्या वजह है गठिया बाई रोग लगने की
यंग एज में घुटने में लगी चोट से अधेड़ उम्र में गठिया होने का खतरा बढ़ जाता है. कुछ समय पहले हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि युवावस्था में घुटने के कनेक्टिव टिश्यू या नसों में लगी चोट या हड्डियों के टूट जाने से अधेड़ उम्र में गठिया का दर्द होने का खतरा बढ़ जाता है.

एक लाख पचास हजार वयस्कों पर हुआ शोध
शोधकर्ताओं ने 25 से 34 साल की उम्र के 1,50,000 वयस्कों पर अध्ययन किया. इनमें से 5,200 लोगों में घुटने से जुड़ी चोट का इतिहास था. इन लोगों की दो दशकों तक निगरानी की गई. शोधकर्ताओं ने पाया कि युवावस्था में घुटने में चोट नहीं लगने वालों की तुलना में घुटने में चोट लगने वालों में गठिया होने का खतरा छह गुना तक ज्यादा था. अध्ययन के शुरुआती 11 सालों में खतरा ज्यादा पाया गया, जबकि बाद के आठ सालों में यह तीन गुना ज्यादा पाया गया.

थाइबोन और शिनबोन
ऊतकों को क्षति पहुंचना नुकसानदेह शोध में पाया गया कि जिनके थाइबोन और शिनबोन के बीच मौजूद ऊतक क्षतिग्रस्त हो गए थे उनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस होने का खतरा 19.6 फीसदी तक ज्यादा था. वहीं शिनबोन के टूटने से गठिया होने का खतरा 6.6 फीसदी तक बढ़ गया.

मीनिसकस और लिगामेंट
असामान्यता स्वीडन की लैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता बारबरा स्नोइकेर ने कहा, घुटने के जोड़ में लगी चोट खासकर मीनिसकस और लिगामेंट में लगी चोट घुटने के रसायनिक पैटर्न में बदलाव कर देती है. इन चोटों से घुटने के जोड़ में असामान्यता आ जाती है. इससे जोड़ के कार्टिलेज को नुकसान पहुंचता है और गठिया होने का खतरा बढ़ जाता है. ऑस्टियोआर्थराइटिस नामक गठिया शरीर का वजन उठाने वाले सबसे बडे़ जोड़ को नुकसान पहुंचाती है और ऐसी स्थिति में घुटने को बदलने की जरूरत पड़ती है.

hi_INHindi
hi_INHindi
Share via
Copy link
Powered by Social Snap