मिस्त्र में प्राचीन समय की रहस्यमयी ममी को जो भी देखता है उसकी हो जाती है मौत


जब भी प्राचीन मिस्र का नाम आता है, मन में तरह-तरह के सवाल पैदा हो जाते हैं, जैसे ममी, मकबरा, पिरामिड. यहां अक्सर प्राचीन समय की ममी मिलती रहती हैं.

आज हम आपको एक ऐसी रहस्यमय ममी की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसे आज तक जिसने भी छुआ, उसकी मौत हो गई.

हॉवर्ड कॉर्टर ने खोजी थी ममी
ये रहस्यमय ममी मिस्र के सबसे कम उम्र के राजा तूतेनखामून की थी, जो करीब 3200 साल से जमीन के अंदर दफन थी. इसे 97 साल पहले यानी साल 1922 में खोजा गया था. ब्रिटिश पुरातत्ववेत्ता हॉवर्ड कॉर्टर ने इस रहस्यमय ममी की खोज की थी.

ममी के नीचे मिला सोने से भरा कमरा
कहते हैं कि तूतेनखामून की कब्र के नीचे बेशकीमती खजाना गड़ा हुआ था. जब उनकी कब्र खोजी गई, तो पुरातत्ववेत्ताओं को उनकी ममी के नीचे सीढ़ियां मिलीं, जिससे एक कमरे तक पहुंचने का रास्ता था. वो कमरा सोने-चांदी से भरा हुआ था.

शांति भंग करने पर मिलती है सजा
तूतेनखामून के मकबरे के दरवाजे पर मिस्र की प्राचीन भाषा में एक चेतावनी भी लिखी हुई थी. चेतावनी में साफ-साफ लिखा हुआ था कि जो भी राजा तूतेनखामून की शांति को भंग करेगा, उसकी मौत हो जाएगी.

कब्र से ममी हटाकर खजाना निकालना पूरी टीम को पड़ा भारी
हालांकि इसके बावजूद पुरातत्ववेत्ताओं ने उस चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया, जिसका असर ये हुआ कि एक-एक कर हॉवर्ड कॉर्टर की टीम के सभी सदस्यों की मौत हो गई. इन सभी लोगों ने मिलकर कब्र से तूतेनखामून की ममी हटाकर खजाना निकाला था.

लॉर्ड जॉर्ज कारनारवन की हुई थी रहस्यमयी मौत
मौत का ये सिलसिला यही नहीं थमा, बल्कि हॉवर्ड कॉर्टर को जिस शख्स ने तूतेनखामून की कब्र और खजाना खोजने की जिम्मेदारी दी थी, उसकी भी कुछ ही महीनों में रहस्यमय तरीके से मौत हो गई. ये शख्स थे लॉर्ड जॉर्ज कारनारवन, जिन्होंने सबसे पहले तूतेनखामून के कंकाल को छुआ था.

तूतेनखामून रहस्यमयी ममी
कहते हैं कि बाद में तूतेनखामून की रहस्यमय ममी को जिन-जिन लोगों ने देखा, वो या तो पागल हो गए या किसी न किसी वजह से उनकी मौत हो गई. मिस्र के राजकुमार अली कामिल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. दरअसल, वो और उनकी पत्नी दोनों उस रहस्यमय ममी को देखने पहुंचे थे, लेकिन घर लौटते ही उनकी पत्नी को न जाने क्या हुआ कि उन्होंने राजकुमार की हत्या कर दी. इन घटनाओं के बाद से उस ममी को शापित माना जाने लगा.

ममी से प्रभावित थी लेडी एवलिन
हालांकि बाद में हॉवर्ड कॉर्टर की मांग पर सरकार ने उस रहस्यमय ममी को फिर से उसी जगह पर दफना दिया, लेकिन कुछ सालों के बाद लॉर्ड जॉर्ज कारनारवन की बेटी लेडी एवलिन के आदेश पर फिर से उस ममी को कब्र से बाहर निकाला गया और उसे मिस्र से लंदन लाया गया, जहां उसे म्यूजियम में रखा गया. कहते हैं कि लेडी एवलिन उस ममी से इतनी प्रभावित थीं कि वो रोज म्यूजियम में उसे देखने जाती थीं. एक दिन जब वो ममी देखने के बाद बाहर आईं तो अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई।

hi_INHindi
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