गंगा में बढ़ते जीवाणुओं की वजह से, असर नहीं कर रही जीवाणु रोधी दवाएं


ganga Ghat

गंगा पर पहले भी शोध किए जा चुके हैं. हैरानी भरे तथ्य पहले भी सभी के सामने आ चुके हैं. लेकिन अब जो शोध हुआ वो बेहद ही चौकाने वाला है. आपको बता दें कि भारत में गंगा को आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाता है जिससे लोग गंगा में स्नान करके अपने पापों को धोना मानते हैं. और गंगा का जल पीकर पवित्र मानते हैं जबकि अब गंगा की हकीकत से ये लोग कोसों दूर है और आस्थवान लोग गंगा को आध्यात्मिक दृष्टि से देखने की वजह से उसमें मिश्रण जानलेवा प्रदूषण को नहीं देख पा रहे हैं. तो आइए जानते हैं कि ये शोध में क्या पाया गया….

जीवाणुरोधी दवाओं का असर खत्म
गंगोत्री में गंगा के पानी में ऐसे जीवाणुओं की संख्या बढ़ने की बात सामने आई है, जिन पर जीवाणु रोधी दवाएं असर करना बंद कर देती हैं. हाल ही में एक शोध में सामने आया है कि ये जीवाणु वहां भी अधिक पाए जा रहे हैं जहां इनके होने की संभावना कम है.

चारधाम यात्रा से बढ़ते हैं बैक्टीरिया
केंद्र सरकार ने हाल ही में मोतीलाल नेहरू इंस्टीट्यूट, नीरी नागपुर और सरदार पटेल इंस्टीट्यूट गोरखपुर से गंगा में ऐसे जीवाणुओं का पता लगाने को शोध करने को कहा है आईआईटी दिल्ली और न्यू कैसल विश्वविद्यालय ने 2014 में एक शोध के दौरान पाया था कि एंटी बैक्टीरिया दवाओं के लिए बेअसर होने वाले बैक्टीरिया गंगा में चारधाम यात्रा के दौरान 60 गुना तक बढ़ जाते हैं.

पनप रहे जीवाणु
अब यह पाया गया है कि ये बैक्टीरिया गंगोत्री के 150 किलोमीटर के दायरे में भी अधिक पाए जा रहे हैं. गंगा के तेज बहाव के बावजूद इन जीवाणुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है।

hi_INHindi
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