जानिए, पुणे के ‘शनिवारवाडा किला’ में क्यों मना है जाना, ढलती शाम के बाद


बाजीराव पेशवा से जुड़ा पुणे शनिवारवाड़ा किला एक लैंडमार्क साइट है. जिससे ये जगह काफी लोकप्रिय है. यहां पर बड़ी संख्या में लोग आकर इस जगह की खूबसूरती की चर्चा करते हैं. जानकार लोग इस जगह को हॉन्टेड होने का दावा करते हैं. और इस जगह पर सूरज ढलने के बाद जाने के लिए मना करते है.

क्षतिग्रस्त किले का बचा है सिर्फ वाडे वाला पार्ट
इस किले के बारें में पढ़ने के बाद आपको पता चलेगा कि ये प्राचीन किला ईंट और पत्थरों से बना हुआ है. आपको बता दें कि ब्रिटिश तोपों के हमले के बाद इस किले के वाडे का सिर्फ पत्थर वाला पार्ट बचा है. हमले से पहले इस किले में की गई नक्काशी को देखकर पर्यटकों की नजरें नहीं हटती थी.

तीन बेटे थे नाना साहब के
बाजी राव की मौत के बाद उनके बेटे बालाजी बाजी राव जिन्हें नाना साहब कहते हैं, उन्होंने मराठा सम्राज्य की बागडोर अपने हाथ में ली थी. आपको बता दें कि नाना साहब के तीन बेटे थे- माधव राव, विश्व राव और नारायण राव. एक युद्ध में नाना साहब की मौत के बाद उनके बड़े बेटे माधव राव को सिंहासन पर बैठाया गया. दुर्भाग्यवश उनके दूसरे बेटे नाना साहब, विश्व राव भी युद्ध में मारे गए.
माधव राव यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए और उनकी भी मौत हो गई.

नारायण राव को बनाया गया पेशवा
माधव राव की मौत के बाद नारायण राव को पेशवा बनाने के लिए चुना गया. जो सिर्फ 16 साल के थे. वह छोटे थे इसलिए उनकी मदद उनके चालाक चाचा रघुनाथ राव करते थे. 1773 में नारायण राव ने अपने खिलाफ हो रही सारी साजिशों को खत्म करने की कोशिश की. उसने चाचा का कंट्रोल खत्म करके उनको हाउस अरेस्ट करवा दिया. यह बात सबको पता थी नारायण राव को शिकारियों की एक ट्राइब पसंद नहीं करती थी. चाचा रघुनाथ की पत्नी आनंदीबाई ने इसका फायदा उठाया. उसने अपने पति से उस जनजाति के सरदार को चिट्ठी लिखवाई कि वे नारायण राव को पकड़ लें. चिट्ठी भेजने से पहले उसने चालाकी से इसमें इशारे में लिख दिया कि वह नारायण राव को मार दे.जनजाति के सरदार को चिट्ठी मिली और उन्होंने उसे मारने के लिए अपने आदमी भेज दिए. खूनी नारायण राव के कमरे में पहुंचे, उसे सोते से जगाया और उसके टुकड़े-टुकड़े करके नदी में बहा दिया.

वाड़े में भटकती है आत्माएं
पुणे के लोगों का मानना है कि वाड़े में यहां मरे हुए लोगों की आत्माएं भटकती हैं. इन्हीं वजहों से लोग यहां शाम को 6.30 बजे के बाद जाने से कतराते हैं. यहां आसपास रहने वाले लोगों का यह भी दावा है कि पूरणमासी को यहां नारायण राव के चिल्लाने की आवाजें भी आती हैं.

एडवेंचर लवर और आर्किटेक्चर लवर
अब आप इस पर यकीन करें न करें लेकिन अगर अडवेंचर लवर हैं तो शनिवारवाड़ा घूमने जा सकते हैं अगर हिस्ट्री औऱ आर्किटेक्चर लवर हैं तो भी यहां जाना बनता है।

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