रविवार की रात को जेएनयू में एक बार फिर भड़की हिंसा कई दर्जन छात्र हुए घायल


दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में एक बार फिर हिंसा भड़कने से कुछ नकाबपोश हमलावरों ने यहां छात्रों-फैकल्टी मेंबर पर हमला कर दिया,

यह घटना रविवार देर रात को घटी. जिसमें दो दर्जन से अधिक छात्र घायल हो गए हैं. देर रात को यूनिवर्सिटी कैंपस में क्या हुआ, उसकी कहानी वहां पर मौजूद छात्र बता रहे हैं और अपनी आपबीती भी सुना रहें हैं. आइए जानते हैं उनकी आपबीती कि रविवार की रात को क्या हुआ था.

रजिस्ट्रेशन को लेकर हुआ था विवाद
एबीवीपी के सदस्य शिवम चौरसिया जो कि JNU में PHD का छात्र है, उसपर रोड से हमला किया गया था. उनका कहना है कि डॉक्टरों ने उन्हें टांके लगाए, इसके अलावा गले के पिछले हिस्से पर भी हमला किया गया है. शिवम के मुताबिक, ये सारा बवाल रजिस्ट्रेशन को लेकर हुआ था. टांके लग जाने के बाद शिवम को एम्स से डिस्चार्ज कर दिया गया.

सभी छात्रों पर हुआ लोहे की रॉड से हमला
एबीवीपी के ही सदस्य मनीष जो कि पीएचडी का छात्र है. उसका कहना है कि हमले में उसके हाथ में फ्रैक्चर हुआ है, रॉड पर हमला होने की वजह से उसका हाथ चोटिल हो गया. वहीं जेएनयू में M-Phil के छात्र शेषमणि का कहना है कि हमले के दौरान उसके हाथ में फ्रैक्चर हो गया, हाथ में प्लास्टर हुआ है और रॉड भी लगाया गया है. शेषमणि का आरोप है कि हमलावरों ने उसके हाथ-पैर पर लोहे की रॉड से हमला किया था.

जामिया के भी कुछ छात्र थे शामिल
शेषमणि ने कहा कि इसी दौरान 500-600 लेफ्ट समर्थित छात्रों ने हमला किया, जिसमें जामिया के कुछ छात्र भी शामिल थे. जिन्होंने मुझपर अटैक किया उनको मैं पहचानता हूं एक राजनीति विज्ञान का छात्र है संदीप सिंह और दूसरा उसी का दोस्त है लेकिन वो JNU का छात्र नहीं है.

जेएनयू के छात्र का आरोप
हिंसा को लेकर जेएनयू की छात्र गीता का आरोप था कि बवालियों ने साबरमती के ब्यॉज हॉस्टल के सभी कमरों पर हमला किया लेकिन वहां एबीपीवी के छात्रों के कमरों को छोड़ दिया गया.

पुलिस की तरफ से नहीं मिली मदद
जेएनयू में ही एमफिल की छात्र प्रियंका ने कहा कि वहां पर भीड़ पहले से ही मौजूद थी, शाम को प्रोटेस्ट था. काफी लोग गोदावरी बस स्टैंड के पास इकट्ठा हुए, तभी मारा-मारी शुरू हो गई. प्रियंका बोलीं कि अभी भी घर से फोन आ रहे हैं, वापस आने की बात कही जा रही है. उन्होंने कहा कि जितनी भीड़ थी, उस हिसाब से हिंसा रुक जाना चाहिए थी, 100 डायल करने पर भी मदद नहीं की गई थी.

कैंपस में किया फ्लैग मार्च
बता दें कि रविवार शाम करीब 5 बजे के बाद जेएनयू में हिंसा शुरू हुई थी. पहले कुछ नकाबपोश हमलावर यूनिवर्सिटी के कैंपस में घुसे उसके बाद लगातार हमला किया, तोड़फोड़ की. इस दौरान कई छात्र, फैकल्टी घायल हो गए. देर रात को ही पुलिस ने कैंपस में फ्लैग मार्च किया.

विश्वविद्यालयों की चिंताजनक स्थिति
देश के बड़े विश्वविद्यालय की छवि दिनोंदिन धूमिल होती जा रही है. हिंसक विरोधों को देखते हुए कोई भी माता-पिता अपने बच्चों शायद ही पढ़ाना चाहेंगे. छात्रों के मुताबिक, कि अगर ये विश्वविद्यालयों का यही हाल रहा तो हर कोई छात्र यहां पर एडमिशन के लिए घबराएगा।

hi_INHindi
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