पहाड़ी इलाकों में स्थानीय लोगों के लिए ‘बर्फबारी’ बन रही मुसीबत


एक तरफ जहां मैदानी इलाके के लोग बर्फबारी का आनंद लेने के लिए तरसते हैं तो वही बर्फ पड़ने वाली जगह पर रहने वाले लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है.

उन लोगों के लिए घर से निकलना मुश्किल हो रहा है. भूस्खलन से यातायात बाधित कर दिए गए है. आइए जानते है बर्फबारी होने से कौन-कौन से इलाके हुए है प्रभावित,

जम्मू-कश्मीर में मुसीबत का नजारा
जवाहर टनल के पास भारी बर्फबारी के बाद एक बार फिर से जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय हाईवे को बंद कर दिया गया है. इतना ही नहीं रामबन में भूस्खलन की वजह से भी यातायात बाधित की गई है. इस वजह से हाईवे से आने वाली गाड़ियां और सैकड़ों लोग रास्ते में ही फंस गए हैं. फिर से हाईवे पर यातायात सेवा कब शुरू होगी, इस सवाल के जवाब में पुलिस ने कहा कि राजमार्ग खुलने की सूचना मिलने के बाद ही उधमपुर से वाहनों को घाटी की तरफ भेजा जाएगा.

बर्फबारी होने से फंसे यात्री
वहीं, हिमाचल प्रदेश के सोलांग में भी बर्फबारी की वजह से सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सोलांग और मनाली के बीच कम से कम 300 पर्यटक और टैक्सी फंसे हैं. भारी बर्फबारी ने टैक्सी ड्राइवर और अन्य यात्रियों की समस्या बढ़ा दी है.

उत्तराखंड के कई जिलों में फिर बर्फबारी होने की संभावनाएं
मौसम विभाग के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि मंगलवार तक कुल्लू, चंबा, लाहौल-स्पीति, शिमला, कांगड़ा और किन्नौर जिलों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश या बर्फबारी होने की संभावना है. भूस्खलन की भी आशंका है. लाहौल-स्पीति का जिला मुख्यालय केलांग शून्य से 9 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान के साथ राज्य में सबसे ठंडा जगह रहा.

जानिए, उत्तराखंड के कई जिलों का तापमान
किन्नौर जिले के कल्पा में न्यूनतम तापमान शून्य से 2.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज हुआ, जबकि मनाली में शून्य से 0.4 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज हुआ. वहीं, धर्मशाला में 3.8 डिग्री सेल्सियस और कुफरी में शून्य से 3.2 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान दर्ज किया गया.

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