आईशी घोष जेएनयू में हमला करने वाले हमलावरों को बोला, पीठ पीछे वार करने वाले कायर


निशस्त्र छात्रा आईशी घोष के सामने, जीतकर भी हार गए जेएनयू के हमलावर

एक दुबली-पतली छोटी सी लड़की. जेएनयू कैम्पस में साबरमती होस्टल के चौराहे पर कार से उतरी. सोमवार शाम के पाँच बजे हैं. माथे पर चारों तरफ़ से पट्टी बंधी है. हाथ भी ज़ख़्मी है और कलाई पर बैंडेज है. सैकड़ों की भीड़ पहले से ही इंतज़ार कर रही थी. कार से उतरते ही इंतज़ार कर रहे लोगों की मुट्ठियाँ आसमान में लहराने लगीं और उस लड़की के स्वागत में ‘लाल सलाम’ के नारे गूंज उठे. लोगों के जोश को देख वो लड़की भी मुस्कुरा उठी.

आईशी घोष ने साथियों के साथ दोहराई मांगें
ये लड़की है जेएनयू स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष आईशी घोष. आईशी जेएनयू में इंटरनेशनल स्टडीज़ से एमफ़िल कर रही हैं. रविवार की शाम आईशी की एक वीडियो आया जिसमें दिख रहा है कि उनके माथे से ख़ून निकल रहा है और चेहरा लगभग रंग गया है. सोमवार की शाम वो फिर कैंपस में आईं और अपने साथियों के साथ माँगें दोहराती दिखीं. उन्होंने यह भी बताया कि कैसे रविवार की शाम नक़ाबपोशों ने घेरकर मारा.

कायर हमलावर
आईशी बताती हैं, ”मैं कहती रही कि आप ऐसे कैसे मार सकते हैं. आप क्या कर रहे हैं. लेकिन किसी ने नहीं सुनी. मैं बस लिंच होने से बच गई. रॉड से सिर पर वार किया और मैं गिर गई. वो होस्टल में घुसकर गुंडई करते रहे. मैंने पुलिस को फ़ोन किया लेकिन पुलिस नहीं आई.

मुझे मरने का डर नहीं है. हमें मारना आरएसएस और एबीवीपी के डर को दिखाता है. उनके पास आज की तारीख़ में क्या नहीं है? जेएनयू का वीसी उनका है, सत्ता उनके पास है, पुलिस उनके नियंत्रण में है. फिर भी वो हमसे क्यों डरे हुए हैं?”

hi_INHindi
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