24 अप्रैल से रमजान शुरू हुआ तो इसके 10 दिन लॉकडाउन में गुजरेंगे, मुस्लिमों को एडवायजरी- घरों में इबादत करें, इफ्तार की रकम से गरीबों को राशन दें


Eid-ul-Fitr being celebrated across the country | 2016-07-07

नई दिल्ली. देश में 21 दिन से जारी लॉकडाउन 19 दिन और बढ़ा दिया गया। अब ये 3 मई तक जारी रहेगा। इसी दौरान रमजान का पवित्र महीना भी शुरू होगा। अगर 23 अप्रैल की रात चांद दिखता है तो रमजान 24 अप्रैल से शुरू होगा। वर्तमान स्थिति के अनुसार, 3 मई तक लॉकडाउन रहेगा। यानी रमजान के शुरुआती 10 दिन लॉकडाउन में गुजरना तय माना जा सकता है। इस दौरान मुस्लिम मस्जिद नहीं जा सकेंगे। घर में ही इबादत और इफ्तार करना होगा। विशेष नमाज तरावीह भी मस्जिद में नहीं होगी।

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन और लखनऊ के शहर काजी मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने रमजान के लिए एडवाइजरी जारी की। उन्होंने कहा- रमजान में लॉकडाउन का पालन करें और इस महामारी से बचाने के लिए अल्लाह से खास दुआ करें। रमजान में लोग तरावीह की नमाज पढ़ें, लेकिन मस्जिद में एक वक्त में पांच से ज्यादा लोग जमा न हों। मोहल्ले के बाकी लोग मस्जिदों की बजाय घरों में ही रहकर तरावीह और दूसरी नमाजें अदा करें।

मौलाना की अपील, कोई इंसान भूखा न रहे
मौलाना फिरंगी महली ने कहा- रमजान के महीने में जो लोग मस्जिद में इफ्तारी भेजते थे, वे इस साल भी करें। लेकिन, मस्जिद की बजाय जरूरतमंदों के घर पहुंचाएं। रमजान में इफ्तार पार्टियां करने वाले इसकी रकम से गरीबों को राशन बांटें। रोजेदार ये तय करें कि कोई भी इंसान भूखा ना रहे। जिन लोगों पर जकात फर्ज है, वे गरीबों में जकात जरूर बांटें।

सऊदी अरब में भी धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी मुस्लिम समाज से लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के पालन की अपील की। उन्होंने घरों पर ही इबादत करने का अनुरोध किया। राज्यों के वक्फ बोर्डों की रेगुलेटरी बॉडी (नियामक संस्था) केन्द्रीय वक्फ परिषद के अध्यक्ष नकवी ने बताया कि कोरोना को हराने के लिए सऊदी अरब सहित ज्यादातर मुस्लिम देशों ने भी रमजान के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है।

इस्लामिक कैलेंडर चांद पर आधारित होता है 
रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है। इसके अगले यानी दसवें महीने को शव्वाल कहा जाता है। इस महीने की पहली तारीख को ईद-उल-फितर मनाते हैं। मुस्लिम इस्लामिक धार्मिक पर्वों को मनाने का सही समय जानने के लिए इसी कैलेंडर का इस्तेमाल करते हैं। यह कैलेंडर चांद पर आधारित है। कभी महीना 29 दिन का होता है, तो कभी 30 दिन का। साल में बारह महीने और 354 या 355 दिन होते हैं। सूर्य पर आधारित कैलेंडर से यह 11 दिन छोटा होता है। इसलिए इस्लामी धार्मिक तिथियां हर साल पिछले सोलर कैलेंडर के हिसाब से 11 दिन पीछे हो जाती हैं।

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